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कथाएँ एवं घटनाएँ

महाभारत, रामायण और पुराणों की प्रमुख घटनाएँ एवं कथाएँ।

द्रौपदी स्वयंवरपांचाल राजा द्रुपद के स्वयंवर में अर्जुन ने मत्स्यवेध करके द्रौपदी को प्राप्त किया।लाक्षागृह दाहवारणावत में पांडवों को जलाने के लिए बनवाए लाक्षा-भवन से पांडव विदुर की सूचना से बच निकले।चीरहरणद्यूत सभा में दुशासन ने द्रौपदी का चीर खींचकर अपमान किया, पर श्रीकृष्ण की कृपा से उसका वस्त्र अक्षय रहा।राजसूय यज्ञइंद्रप्रस्थ में युधिष्ठिर ने सम्राट पद की प्राप्ति हेतु राजसूय यज्ञ किया, जिसमें शिशुपाल का वध हुआ।खांडव दहनअग्नि की प्रार्थना पर कृष्ण और अर्जुन ने खांडव वन जलाया; इंद्र को रोका और मय दानव को जीवनदान दिया।मयसभा निर्माणमय दानव ने इंद्रप्रस्थ में दिव्य सभा भवन बनाया, जिसके वैभव ने दुर्योधन की ईर्ष्या को जन्म दिया।पांडवों का वनवासद्यूत में हारकर पांडवों ने बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास स्वीकार किया।यक्ष प्रश्नवन में यक्ष ने युधिष्ठिर से धर्म के गूढ़ प्रश्न पूछे; सही उत्तरों से उनके चारों भाई पुनः जीवित हुए।अज्ञातवासतेरहवें वर्ष पांडवों ने विराट नगर में भिन्न-भिन्न वेश धारण करके अज्ञातवास किया।कीचक वधविराट के सेनापति कीचक के दुर्व्यवहार से क्रुद्ध होकर भीम ने उसका वध किया।गीता उपदेशकुरुक्षेत्र में मोहग्रस्त अर्जुन को श्रीकृष्ण ने कर्मयोग, ज्ञान और भक्ति का दिव्य उपदेश दिया।भीष्म की शरशय्याअर्जुन के बाणों से भीष्म बाणों की शय्या पर लेटे और उत्तरायण तक प्रतीक्षा करते हुए देह त्यागा।चक्रव्यूहद्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना की, जिसमें प्रवेश करने पर अभिमन्यु अकेले फँस गए।अभिमन्यु वधसोलह वर्षीय अभिमन्यु ने चक्रव्यूह में अकेले अनेक महारथियों से युद्ध कर वीरगति पाई।जयद्रथ वधअभिमन्यु-वध के प्रतिशोध में अर्जुन ने सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ का वध किया।कर्ण वधयुद्ध के सत्रहवें दिन अर्जुन ने कर्ण का वध किया, जब उसका रथ कीचड़ में फँसा था।दुर्योधन वधगदा युद्ध में भीम ने दुर्योधन की जाँघ तोड़ी और अंततः दुर्योधन का अंत हुआ।गदा युद्धभीम और दुर्योधन के बीच भीषण गदा-युद्ध हुआ, जिसमें भीम ने दुर्योधन को पराजित किया।द्रोण वधअश्वत्थामा की मृत्यु का झूठा समाचार सुनकर शस्त्र त्यागे द्रोणाचार्य का धृष्टद्युम्न ने वध किया।सौप्तिक युद्धरात्रि में अश्वत्थामा ने सोए पांडव-शिविर पर आक्रमण कर द्रौपदी के पुत्रों का वध किया।गांधारी का शापपुत्र-शोक से दुखी गांधारी ने श्रीकृष्ण को छत्तीस वर्ष बाद यदुकुल के नाश का शाप दिया।युधिष्ठिर राज्याभिषेकयुद्ध के बाद युधिष्ठिर का हस्तिनापुर के राजा के रूप में विधिवत राज्याभिषेक हुआ।अश्वमेध यज्ञयुद्ध-जनित पाप के प्रायश्चित्त और सार्वभौम सत्ता हेतु युधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ किया।मौसल संहारप्रभास तीर्थ पर यदुवंशियों का आपसी संहार हुआ; बलराम और श्रीकृष्ण ने देह त्याग किया।पांडवों का स्वर्गारोहणपांडव द्रौपदी सहित महाप्रस्थान पर निकले; अंत में केवल युधिष्ठिर देह सहित स्वर्ग पहुँचे।हिडिंबा विवाहवनवास में भीम ने राक्षसी हिडिंबा से विवाह किया, जिससे घटोत्कच का जन्म हुआ।बकासुर वधएकचक्रा नगर में भीम ने बकासुर राक्षस का वध करके ब्राह्मणों का भय दूर किया।विराट युद्धअज्ञातवास उजागर होने पर अर्जुन ने विराट की ओर से युद्ध करके कौरवों को पराजित किया।कुरुक्षेत्र युद्धकौरवों और पांडवों के बीच कुरुक्षेत्र में अठारह दिन का महायुद्ध हुआ, जिसमें पांडव विजयी हुए।विदुर नीतियुद्ध की आशंका से चिंतित धृतराष्ट्र को विदुर ने नीति, धर्म और राजधर्म का उपदेश दिया।श्रीराम जन्मअयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र के रूप में श्रीराम का जन्म हुआ।सीता स्वयंवरमिथिला में श्रीराम ने शिव धनुष तोड़कर सीता से विवाह किया।परशुराम संवादसीता स्वयंवर में शिव धनुष टूटने पर क्रुद्ध परशुराम राम को ललकारते हैं, पर अंत में उन्हें विष्णु का अंश जानकर शांत हो जाते हैं।राम वनवासकैकेयी के दो वरदानों के कारण श्रीराम, सीता और लक्ष्मण चौदह वर्ष का वनवास भोगने के लिए अयोध्या से प्रस्थान करते हैं।दशरथ मृत्युपुत्र-वियोग के दुःख में डूबे राजा दशरथ को अपने पूर्वकर्म का शाप स्मरण होता है और उनका देहांत हो जाता है।भरत मिलापभरत राज्य स्वीकारने से इनकार कर चित्रकूट जाकर राम से मिलते हैं और चरण-पादुका लेकर अयोध्या लौट जाते हैं।शूर्पणखा प्रसंगपंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा के मोह और उपद्रव पर लक्ष्मण उसके नाक-कान काट देते हैं, जिससे रावण-राम युद्ध का बीज पड़ता है।सीता हरणरावण मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर भेजता है और राम-लक्ष्मण के दूर जाते ही संन्यासी वेश में सीता का अपहरण कर लेता है।जटायु मोक्षगृध्रराज जटायु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करते हैं और घायल अवस्था में राम के हाथों प्राण त्यागकर मोक्ष पाते हैं।सुग्रीव मैत्रीहनुमान के माध्यम से राम और सुग्रीव अग्नि-साक्षी मैत्री करते हैं — राम वाली वध का वचन देते हैं और सुग्रीव सीता-खोज में सहायता का।वाली वधराम सुग्रीव और वाली के द्वंद्व में वाली पर बाण चलाकर उसका वध करते हैं, जिससे सुग्रीव को किष्किन्धा का राज्य मिलता है।लंका दहनहनुमान लंका जाकर अशोक वाटिका में सीता से भेंट करते हैं, फिर रावण की पूँछ में लगी आग से समूची लंका को जला देते हैं।समुद्र सेतुराम की सेना नल और नील के नेतृत्व में समुद्र पर पत्थरों का सेतु बाँधकर लंका पहुँचने का मार्ग बनाती है।विभीषण शरणागतिधर्म की बात कहने पर रावण से अपमानित विभीषण राम की शरण में आते हैं और राम उन्हें शरणागत वत्सल भाव से स्वीकार करते हैं।राम-रावण युद्धलंका में राम-रावण महायुद्ध में कुंभकरण और मेघनाद का वध होता है और अंततः राम रावण का संहार करते हैं।अग्नि परीक्षालोक-निंदा के कारण राम सीता से अग्नि परीक्षा देने को कहते हैं और अग्निदेव सीता को निर्दोष सिद्ध करके सुरक्षित लौटाते हैं।राम राज्याभिषेकयुद्ध के बाद राम पुष्पक विमान से अयोध्या लौटते हैं, भरत से मिलते हैं और रामराज्य का राज्याभिषेक होता है।सीता त्यागअयोध्या में प्रजा की निंदा के कारण राम सीता का परित्याग करते हैं और लक्ष्मण सीता को वाल्मीकि आश्रम में छोड़ आते हैं।राम अश्वमेधराम अश्वमेध यज्ञ करते हैं; यज्ञ के अश्व को लव और कुश पकड़ लेते हैं और वाल्मीकि आश्रम में रामायण का गान करते हैं।सीता का भूमि प्रवेशदरबार में शुद्धि का प्रमाण माँगे जाने पर सीता अपनी माता पृथ्वी का स्मरण करती हैं और धरती फटकर उन्हें अपने में समा लेती है।गजेन्द्र मोक्षग्राह के पंजे में फँसे गजराज की पुकार पर विष्णु गरुड़ पर आकर उन्हें मुक्त कराते हैं — यह भक्ति का प्रसिद्ध प्रसंग है।शिव-पार्वती विवाहपूर्वजन्म की सती के त्याग के बाद पार्वती कठोर तप करके शिव को प्रसन्न करती हैं और उनसे विवाह करती हैं।गणेश जन्मपार्वती-रचित पुत्र का शिव द्वारा शीश कटने पर हाथी का मुख लगाकर उसे जीवन मिलता है और वे पूज्य गणपति बनते हैं।दक्ष यज्ञदक्ष बिना शिव को बुलाए यज्ञ करते हैं; पिता के अपमान से दुखी सती देह त्यागती हैं और वीरभद्र दक्ष का वध करते हैं।तारकासुर वधशिव-पुत्र कार्तिकेय देवताओं के सेनापति बनकर असुर तारकासुर का वध करते हैं और देवताओं को मुक्ति दिलाते हैं।गंगावतरणभगीरथ की तपस्या से गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरती हैं, शिव की जटा में विश्राम पाकर और सगर-पुत्रों का उद्धार करती हैं।श्रीकृष्ण जन्मअत्याचारी कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव के पुत्र रूप में श्रीकृष्ण का जन्म होता है और वसुदेव उन्हें गोकुल पहुँचा देते हैं।पूतना वधकंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना विष-स्तन से शिशु कृष्ण को मारना चाहती है, पर कृष्ण उसके प्राण हर लेते हैं।कालिय मर्दनकालिय नाग के विष से दूषित यमुना में कूदकर कृष्ण उस पर विजय पाकर उसे निर्वासित करते हैं और यमुना को शुद्ध करते हैं।गोवर्धन लीलाकृष्ण गोवर्धन पूजा कराते हैं और इंद्र की प्रलयकारी वर्षा से गोवर्धन पर्वत को उँगली पर उठाकर गोकुल की रक्षा करते हैं।कंस वधमथुरा में धनुष-यज्ञ के अवसर पर कृष्ण और बलराम मल्ल-युद्ध में चाणूर आदि को मारकर अत्याचारी कंस का वध करते हैं।रुक्मिणी हरणरुक्मिणी श्रीकृष्ण को मन से वर चुकती हैं और कृष्ण उन्हें शिशुपाल से विवाह से पूर्व रथ पर बिठाकर हर लाते हैं।स्यमंतक मणिझूठे चोरी-आरोप से निर्दोष सिद्ध होने हेतु कृष्ण मणि की खोज में जाते हैं और जांबवान से युद्ध कर स्यमंतक मणि लाते हैं।रास लीलाशरद पूर्णिमा की रात वृंदावन में कृष्ण गोपियों के साथ रास-नृत्य करते हैं, जो भक्ति और आत्म-समर्पण की सर्वोच्च लीला है।प्रह्लाद कथाहिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद विष्णु-भक्त बना और नरसिंह ने उसकी रक्षा की।ध्रुव कथाबालक ध्रुव ने कठोर तप से विष्णु को प्रसन्न किया और ध्रुव तारा बना।नचिकेता कथानचिकेता ने यमराज से आत्मा और मृत्यु का रहस्य पूछा।सावित्री-सत्यवान कथासावित्री ने अपनी बुद्धि और प्रेम से पति सत्यवान को यमराज से वापस लाया।नल-दमयंती कथानल और दमयंती की कथा स्वयंवर, वियोग और पुनर्मिलन की प्रसिद्ध कथा है।हरिश्चंद्र कथासत्यनिष्ठ हरिश्चंद्र ने सत्य के लिए राज्य, धन और परिवार त्याग दिया।शुनःशेप कथाशुनःशेप ने यज्ञ-वेदी पर देवताओं की स्तुति से बंधन से मुक्ति पाई।वामन-बलि कथावामन ने तीन पग में राजा बलि से तीनों लोक माँगे और उसे सुतल लोक दिया।नरसिंह अवतरणविष्णु ने आधे नर-आधे सिंह रूप में देहली पर हिरण्यकशिपु का वध किया।वराह अवतरणविष्णु ने वराह रूप में पृथ्वी को रसातल से उठाकर हिरण्याक्ष से बचाया।मत्स्य अवतरणविष्णु ने मत्स्य रूप में मनु और सप्तर्षियों की नाव को प्रलय से बचाया।कूर्म अवतरणविष्णु ने कूर्म रूप में मंदर पर्वत को पीठ पर धारण किया।त्रिपुरासुर वधशिव ने त्रिपुरासुर के तीन नगरों को एक ही बाण से जलाया।अंधकासुर वधशिव ने अंधकासुर का वध किया, जो अंत में शिव का गण बन गया।बाणासुर कथाबाणासुर के अहंकार को शिव-कृष्ण युद्ध में हराया गया।मधु-कैटभ वधविष्णु ने प्रलय के जल में मधु और कैटभ दैत्यों का वध किया।हिरण्याक्ष वधवराह ने हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी को रसातल से उठाया।अमृत मंथनदेवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन से अमृत प्राप्त किया।देवासुर संग्रामदेवताओं और दैत्यों के बार-बार युद्ध में देवताओं की विजय हुई।मोहिनी मूर्तिविष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अमृत देवताओं को पिलाया।कार्तिकेय जन्मशिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया।गणेश कथापार्वती के पुत्र गणेश को शिव ने गणों का स्वामी बनाया।सती कथासती ने पिता दक्ष के यज्ञ में अग्नि में प्राण त्याग दिए।कामदहनशिव ने कामदेव को भस्म कर दिया, जो उन्हें मोहित करने आया था।जलंधर वधशिव ने जलंधर दैत्य का वध किया, जो समुद्र से उत्पन्न हुआ था।नहुष कथाराजा नहुष इंद्र-पद पाकर अहंकार से पतित हुए और अजगर बने।ययाति कथाययाति ने युवावस्था के लोभ में पुत्रों से यौवन माँगा।देवयानी-शर्मिष्ठादेवयानी और शर्मिष्ठा की प्रतिस्पर्धा से ययाति का विवाह हुआ।पुरूरवा-उर्वशीपुरूरवा और उर्वशी का प्रेम अंत में विरह में बदल गया।दुष्यंत-शकुंतलाशकुंतला ने दुष्यंत से विवाह किया और भरत को जन्म दिया।भरत जन्मशकुंतला के पुत्र भरत से भारतवंश और भारत का नाम चला।चंद्र-तारा कथाचंद्रमा ने गुरु की पत्नी तारा से संबंध बनाया, जिससे बुध का जन्म हुआ।बुध जन्मचंद्रमा और तारा के पुत्र बुध बुद्धि के देवता माने गए।इला-सुद्युम्नराजा सुद्युम्न शाप से इला (स्त्री) बने और उनसे चंद्रवंश चला।पृथु कथाराजा पृथु ने पृथ्वी का दोहन करके अन्न और औषधि प्राप्त की।अजामिल कथाअजामिल ने मरण के समय नारायण-नाम के स्मरण से मुक्ति पाई।जड़ भरतजड़ भरत ने राज्य त्यागकर भक्ति और आत्मज्ञान का मार्ग अपनाया।श्वेतकेतुश्वेतकेतु ने पिता उद्दालक से आत्मज्ञान का महावाक्य पाया।सत्यकाम जाबालसत्यवादी सत्यकाम को गुरु गौतम ने आत्मज्ञान दिया।मार्कण्डेय कथामार्कण्डेय को शिव-कृपा से दीर्घायु और मृत्युंजय का वरदान मिला।अघासुर वधअघासुर ने विशाल अजगर का रूप लेकर कृष्ण को निगलना चाहा, किंतु कृष्ण ने देह बढ़ाकर उसका वध कर दिया।आरुणि-उद्दालक कथाउद्दालक आरुणि ने पुत्र श्वेतकेतु को 'तत् त्वम् असि' का उपदेश देकर उसका अभिमान दूर किया।इंद्र का अहंकारवृत्रासुर-वध के बाद इंद्र के अहंकार को एक बालक और चींटियों के दृष्टांत से तोड़ा गया।ऐतरेय की कथाउपेक्षित पुत्र महिदास ऐतरेय ने तपस्या से विद्या पाई और ऐतरेय ब्राह्मण की रचना की।कच-देवयानीबृहस्पति के पुत्र कच ने शुक्राचार्य से संजीवनी विद्या सीखी, पर देवयानी से विवाह से इनकार किया।कुबेर-पुत्रों का उद्धारकुबेर के पुत्र नलकूबर और मणिग्रीव नारद के शाप से वृक्ष बने और कृष्ण के स्पर्श से मुक्त हुए।गोकर्णगोकर्ण में भागवत-सप्ताह से भाई धुंधुकारी की प्रेत-योनि से मुक्ति हुई और वह तीर्थ पवित्र हुआ।द्रौपदी हरणसिंधुराज जयद्रथ ने वन में द्रौपदी का अपहरण किया, पर पांडवों ने उसे पकड़कर दंडित किया।जैसी संगति वैसा चरित्रएक ही जाति के दो तोते अलग-अलग संगति में पले और उनके स्वभाव बिलकुल भिन्न निकले।तिरुपति में विष्णुश्रीनिवास रूप में विष्णु ने कुबेर से ऋण लेकर पद्मावती से विवाह किया और वेंकटाद्रि पर विराजमान हुए।दधीचि का अस्थि-दानवृत्रासुर के वध के लिए दधीचि ने अपनी अस्थियाँ दीं, जिनसे इंद्र का वज्र बना।धेनुकासुर वधबलराम ने तालवन में गधरूप धेनुकासुर को मारकर ग्वालों के लिए वन खोला।नारद-मोह की कथाअहंकार में डूबे नारद को विष्णु ने सरोवर में स्नान कराकर माया का अनुभव कराया।पंचशिख-जनक चर्चासांख्याचार्य पंचशिख कापिलेय ने राजा जनक को आत्मा और मोक्ष का सांख्य-ज्ञान सिखाया।पुरंजयदेवताओं की सहायता के लिए पुरंजय ने इंद्र को वृषभ बनाकर असुरों को जीता और ककुत्स्थ कहलाए।परंतपकौशांबी के राजा परंतप की रानी को विशाल पक्षी उठा ले गया, जहाँ पुत्र उदयन का जन्म हुआ।महिषासुर वधदेवताओं के तेज से जन्मी दुर्गा ने महिषासुर का वध करके तीनों लोकों को मुक्त किया।याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी कथायाज्ञवल्क्य ने मैत्रेयी को बताया कि आत्मा का दर्शन ही सर्वस्व है, शेष सब नश्वर है।प्रियव्रतप्रियव्रत के रथ-चक्रों की लीकों से सात समुद्र और सात द्वीप बने और उन्होंने पृथ्वी बाँटी।पृषधुअनजाने गो-वध के कारण पृषधु को शूद्र होने का शाप मिला, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।चाणूर-मुष्टिकमल्लयुद्ध में कृष्ण ने चाणूर को और बलराम ने मुष्टिक को मार गिराया।रैक्व की कथाराजा जानश्रुति ने रथ और गौएँ अर्पित कर रैक्व से ब्रह्मविद्या प्राप्त की।लक्ष्मी की महिमासमुद्र-मंथन से प्रकट हुई लक्ष्मी ने विष्णु को वरा और देवताओं को श्री से भर दिया।वत्सासुर वधबछड़े का रूप धरकर आए वत्सासुर को कृष्ण ने ग्वालों के बीच पहचानकर मार डाला।पौंड्रकअपने को वासुदेव बताने वाले पौंड्रक का कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से वध किया।पुरंजननारद ने पुरंजन की कथा से बताया कि जीव नौ द्वारों वाली देह-नगरी में भोगों में बँधा है।वरुणदेव का वरदानअनाथ त्रिलोकनाथ ने संतोष और भक्ति से वरुणदेव को प्रसन्न किया और सुख पाया।यमलार्जुन मोक्षदामोदर-लीला में कृष्ण ने ऊखल से यमलार्जुन वृक्ष गिराकर नलकूबर-मणिग्रीव को मुक्त किया।कुवलयापीड़मथुरा के रंगभूमि-द्वार पर कृष्ण ने महावत के वश में दौड़ते हाथी कुवलयापीड़ को मार गिराया।विजय का रहस्यदेवताओं ने आपसी सहयोग से असुरों को हराया; विजय का रहस्य स्वार्थ नहीं, एकता थी।विश्वामित्र-वसिष्ठ कथाविश्वामित्र ने वसिष्ठ की कामधेनु छीननी चाही, पर ब्रह्म-तेज के सामने क्षत्रिय-बल हार गया।वेणु का विनाशअत्याचारी राजा वेणु का ऋषियों द्वारा वध और उसके शरीर से पृथु का प्राकट्य।शकटासुर वधशिशु कृष्ण ने शकटासुर दैत्य के रूप में आए गाड़े को पैर के प्रहार से तोड़ डाला।शबरी के बेरभिलनी शबरी ने राम के आने की प्रतीक्षा में स्वाद लेकर मीठे बेर अर्पित किए।शिव-अर्जुन युद्धअर्जुन ने किरात वेशधारी शिव से युद्ध कर पाशुपतास्त्र प्राप्त किया।बिहुलासती बिहुला ने केले के बेड़े पर पति का शव ले जाकर उसे पुनर्जीवित कराया।सहस्रबाहु और परशुरामपरशुराम ने पितृहंता सहस्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन का वध किया।ऋषभदेव का त्यागराज्य-सिंहासन सौंपकर ऋषभदेव ने वैराग्य धारण किया और जंगल में तप किया।वसुवसिष्ठ के शाप से आठ वसुओं को मनुष्य-योनि में जन्म लेना पड़ा।धृतराष्ट्र का वनगमनपुत्र-शोक से व्यथित धृतराष्ट्र गांधारी सहित वन में तप करने चले गए।वत्सनाभतपस्या में लीन वत्सनाभ को भैंसे रूप धर्म ने बचाया और कृतघ्नता के दोष से मुक्त कराया।भरथरीवैराग्य के कारण राजा भरथरी ने राज्य छोड़ गोरखनाथ के शिष्य बनकर योग अपनाया।त्र्यरुणसारथी-दोष से बालक की मृत्यु पर राजा त्र्यरुण और पुरोहित वृषजान के बीच विवाद हुआ।त्रिदेव-परीक्षाभृगु ने ब्रह्मा, शिव और विष्णु की परीक्षा ली; सहनशील विष्णु सर्वश्रेष्ठ सिद्ध हुए।त्रिहारिणीवेदवती, सीता और द्रौपदी — तीन जन्मों वाली देवी त्रिहारिणी कहलाईं।सहस्रकिरणजल-क्रीड़ा में विघ्न डालने पर रावण ने राजा सहस्रकिरण को बंदी बनाया।नृगभूल से दी गई गाय के कारण राजा नृग को गिरगिट योनि मिली, कृष्ण ने उद्धार किया।उदयनवीणा-प्रेमी वत्सराज उदयन ने वासवदत्ता और पद्मावती से विवाह किया।अंगुलिमालहिंसक डाकू अंगुलिमाल बुद्ध के उपदेश से अहिंसक भिक्षु बन गया।कुंती का त्यागपुत्रों को राज्य सौंपकर कुंती वन में तप करने चली गईं।दान की महिमाशास्त्रों में दान को सर्वश्रेष्ठ धर्म कहा गया, जो इस लोक और परलोक दोनों में रक्षा करता है।पंचकन्याअहल्या, द्रौपदी, कुंती, तारा और मंदोदरी — पंचकन्याओं का स्मरण पाप नष्ट करता है।कौस्तुभ मणिसमुद्र मंथन से निकली कौस्तुभ मणि को विष्णु ने वक्ष पर धारण किया।मदालसारानी मदालसा ने झूले में पुत्रों को ब्रह्मज्ञान का उपदेश दिया।उपचरीआकाश-विहारी राजा उपरिचर वसु के कारण सत्यवती और मत्स्य का जन्म हुआ।कृत्तिवासागजासुर का वध कर शिव उसका चर्म धारण कर 'कृत्तिवासा' कहलाए।मणिमानअगस्त्य के शाप से कुबेर का मित्र यक्ष मणिमान भीम के हाथों मारा गया।उपमन्युदूध की लालसा से उपमन्यु ने शिव की तपस्या की और दूध के सागर पाए।पांचजन्यगुरु-दक्षिणा में शंखासुर का वध कर कृष्ण ने पांचजन्य शंख प्राप्त किया।अमृतसमुद्र मंथन से निकले अमृत का वितरण मोहिनी रूपधारी विष्णु ने किया।कृष्ण जन्माष्टमी व्रत-कथाभाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ; इस व्रत से पाप नष्ट होते हैं।