वेणु का विनाश
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: राजा वेन का वध, वेनु का वध, वेणु
सूर्यवंश में अंग नामक धर्मात्मा राजा हुए। उनके पुत्र वेणु अत्यंत अत्याचारी निकले। वे स्वयं को ही पूज्य बताने लगे और यज्ञ, हवन तथा देव-अर्चन बंद करा दिए। धर्म की मर्यादा टूटती देख ऋषियों ने उन्हें समझाया, पर वे न माने, तब ऋषियों ने अपने मंत्र-बल से उनका वध कर दिया।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के चतुर्थ स्कन्ध में विस्तार से आती है और विष्णु पुराण में भी इसका वर्णन मिलता है। ध्रुव के वंश में अंग और वेणु का प्रसंग जुड़ा है।
मुख्य पात्र अंग, वेणु, ऋषिगण और पृथु हैं। वेणु के वध के बाद ऋषियों ने उनकी जाँघ मथी, जिससे एक काला पुरुष (निषाद) प्रकट हुआ, और हाथ मथने पर भगवान के अंश से पृथु प्रकट हुए। पृथु ने पृथ्वी का दोहन करके प्रजा का पालन किया और धर्मी राज्य की स्थापना की। इस कथा का महत्व यह है कि अधर्मी शासन का अंत अवश्य होता है और धर्म की पुनः स्थापना होती है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – चतुर्थ स्कन्ध