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यमलार्जुन मोक्ष

कथाएँ एवं घटनाएँ

माता यशोदा ने मक्खन की ज़िद करते बालकृष्ण को रस्सी से ऊखल (ओखली) से बाँध दिया; इसी लीला से श्रीकृष्ण 'दामोदर' कहलाए। बँधे हुए कृष्ण ऊखल को घसीटते हुए नंद-भवन के द्वार पर खड़े दो अर्जुन वृक्षों की ओर बढ़े।

यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कन्ध में वर्णित है। वे दो वृक्ष शापित नलकूबर और मणिग्रीव थे, जिन्हें नारद ने वृक्ष होने का शाप दिया था और कृष्ण के स्पर्श से मुक्ति का वचन दिया था।

मुख्य पात्र कृष्ण, यशोदा और शापित कुबेर-पुत्र हैं। ऊखल दोनों वृक्षों के बीच अड़ककर श्रीकृष्ण के खिंचाव से दोनों वृक्ष जड़ से उखड़कर गिर पड़े, और उनसे दो दिव्य युवक प्रकट हुए, जिन्होंने कृष्ण की स्तुति की और भक्ति का वर माँगकर मुक्त होकर अपने लोक को गए। कथा का महत्व यह है कि भगवान का स्पर्श और स्मरण ही जीव के शाप-बंधन को काटकर मुक्ति देता है।

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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध