शिव-पार्वती विवाह
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: शिव-पार्वती परिणय, पार्वती का तप
दक्ष-यज्ञ में सती ने देह त्याग दी थी, जिसके बाद शिव योग-ध्यान में लीन हो गए। दक्ष की पुत्री सती ने हिमालय-पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया।
तारकासुर के वध के लिए ब्रह्मा के वरदान के अनुसार शिव-पुत्र ही उत्तरदायी था, अतः देवताओं ने कामदेव को भेजकर शिव को प्रेरित करना चाहा, पर शिव ने क्रुद्ध होकर कामदेव को भस्म कर दिया।
तब पार्वती ने हिमालय पर्वत पर अत्यंत कठोर तपस्या की और शिव की आराधना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें स्वीकार किया और हिमवान् की आज्ञा से दोनों का भव्य विवाह हुआ।
इस विवाह से कार्तिकेय (जिन्होंने तारकासुर का वध किया) और गणेश का जन्म हुआ। शिव-पार्वती विवाह को शक्ति और शिव के मिलन तथा तपस्या द्वारा ईश्वर-प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।
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स्रोत: शिव पुराण – रुद्रसंहिता