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वेद एवं पुराण

देवता, देवियाँ, ऋषि, अवतार, पौराणिक राजा तथा प्रमुख प्रसंग।

ब्रह्मात्रिमूर्ति के सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, चार मुखों वाले, वेदों के प्रवक्ता और समस्त प्रजापतियों के जनक।विष्णुत्रिमूर्ति के पालक विष्णु, शेषशायी नारायण, दशावतार के आधार और भक्तों के आराध्य।शिवत्रिमूर्ति के संहारक महादेव शिव, कैलाशवासी, रुद्र, त्रिशूल-डमरू धारी और आदियोगी।दुर्गाआदिशक्ति दुर्गा, महिषासुरमर्दिनी, नवरात्रि की नौ स्वरूपों वाली और सिंहवाहिनी देवी।गणेशविघ्नहर्ता गणेश, प्रथम पूज्य, बुद्धि-सिद्धि के दाता, एकदंत और मूषक वाहन वाले।लक्ष्मीधन-ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी, विष्णु की पत्नी, समुद्र मंथन से प्रकट और अष्टलक्ष्मी स्वरूपा।सरस्वतीविद्या, वाणी और संगीत की देवी सरस्वती, हंसवाहिनी, वीणा धारिणी और ब्रह्मा की पत्नी।इंद्रदेवताओं के राजा इंद्र, वज्रधारी, अमरावती के स्वामी, ऐरावत के अधिपति और वृत्रासुर के संहारक।अग्निअग्निदेव, देवताओं के मुख, यज्ञ-हवन के माध्यम, ऋग्वेद के प्रथम स्तुत देव और मेषवाहन।वरुणजल, समुद्र और ऋत (ब्रह्मांडीय नियम) के देवता वरुण, पाशधारी और मकर वाहन वाले।वायुप्राण और वायु के देवता, इंद्र के सारथी, हनुमान-भीम के पिता और मृगवाहन।यममृत्यु और धर्म के देवता यमराज, दंडधारी, महिषवाहन और पितृलोक के स्वामी।सूर्यसूर्यदेव, सूर्यवंश के मूल, सात अश्वों वाले रथ के स्वामी, अरुण सारथी और आरोग्यदाता।चंद्रचंद्र और सोम के देवता, चंद्रवंश के मूल, दक्ष की 27 नक्षत्र-कन्याओं के पति।नारददेवर्षि नारद, ब्रह्मा के मानस पुत्र, वीणा धारी भक्त, नारायण-नाम के प्रचारक और देव-संदेशवाहक।विश्वकर्मादेव शिल्पी विश्वकर्मा, देवताओं के वास्तुकार, रथ-नगर-अस्त्र के निर्माता और शिल्प के अधिष्ठाता।कामदेवप्रेम और काम के देवता कामदेव, पुष्पबाण धारी, रति के पति, अनंग और वसंत के सहचर।दक्षप्रजापति दक्ष, सती के पिता, दक्षयज्ञ के कर्ता और शिव-शापित महाप्रजापति।कश्यपप्रजापति कश्यप, देवता-दैत्य-नाग-गरुड़ आदि समस्त प्रजातियों के पिता और मरीचि के पुत्र।प्रह्लादपरम भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकशिपु के पुत्र, जिनकी रक्षा भगवान नरसिंह ने की।हिरण्यकशिपुअत्याचारी दैत्यराज हिरण्यकशिपु, जिसे भगवान नरसिंह ने वध किया।राजा बलिदानवीर राजा बलि, प्रह्लाद के पौत्र, जिन्हें वामन अवतार ने तीन पग में नापा।मनुप्रथम पुरुष मनु, मनुस्मृति के रचयिता, मत्स्य अवतार द्वारा रक्षित और मानव-जाति के जनक।ययातिचंद्रवंशी राजा ययाति, नहुष के पुत्र, जिन्होंने पुत्रों से यौवन माँगा और पुरु को राज्य दिया।भगीरथराजा भगीरथ, जिनकी घोर तपस्या से गंगा पृथ्वी पर उतरी और जो सगर-वंश के उद्धारक बने।हरिश्चंद्रसत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, जिन्होंने सत्य के लिए राज्य, पत्नी और पुत्र तक त्याग दिए।वसिष्ठब्रह्मर्षि वसिष्ठ, रघुकुल के कुलगुरु, सप्तर्षि, नंदिनी के स्वामी और अरुंधती के पति।विश्वामित्रराजर्षि से ब्रह्मर्षि बने विश्वामित्र, गायत्री मंत्र के द्रष्टा और राम-लक्ष्मण के गुरु।अगस्त्यअगस्त्य मुनि, सप्तर्षि, समुद्र पीने वाले, वातापि-इल्वल के संहारक और दक्षिण भारत के आदि-गुरु।दुर्वासाक्रोधी स्वभाव वाले दुर्वासा मुनि, अत्रि के पुत्र, श्राप-दाता और शिव के अंश माने गए।शुक्रशुक्राचार्य, दैत्यों के गुरु, शुक्र ग्रह, मृतसंजीवनी विद्या के ज्ञाता और देवयानी के पिता।बृहस्पतिबृहस्पति, देवताओं के गुरु, गुरु (बृहस्पति) ग्रह, अंगिरा के पुत्र और इंद्र के पुरोहित।परशुरामपरशुराम, विष्णु के छठे अवतार, फरसा धारी, जमदग्नि के पुत्र और क्षत्रिय-संहारक।मत्स्य अवतारमत्स्य अवतार, विष्णु के प्रथम अवतार, जिन्होंने प्रलय में मनु तथा वेदों की रक्षा की।कूर्म अवतारकूर्म अवतार, विष्णु का कछुआ रूप, जिसने समुद्र मंथन में मंदराचल पर्वत को थामा।वराह अवतारवराह अवतार, विष्णु का वराह (सूकर) रूप, जिन्होंने पृथ्वी को रसातल से दाढ़ों पर उठाया।नरसिंह अवतारनरसिंह अवतार, आधे मनुष्य-आधे सिंह, जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु का वध किया।वामन अवतारवामन अवतार, विष्णु का ब्राह्मण बालक रूप, जिसने तीन पग में राजा बलि को नाप लिया।कल्कि अवतारकल्कि अवतार, विष्णु के भावी दसवें अवतार, जो कलियुग का अंत कर सतयुग की स्थापना करेंगे।समुद्र मंथनसमुद्र मंथन — देव-दानवों द्वारा क्षीरसागर का मंथन और चौदह रत्नों की प्राप्ति।कुबेरधन-निधियों के स्वामी, यक्षों के राजा, उत्तर दिशा के लोकपाल और देवताओं के कोषाध्यक्ष।सप्तर्षिसात महर्षियों का समूह, जो हर मन्वंतर में बदलते हैं और आकाश में सप्तर्षि मंडल बनाते हैं।पुलस्त्यब्रह्मा के मानस पुत्र और प्रजापति; कुबेर के पितामह तथा रावण के प्रपितामह।अत्रिब्रह्मा के मानस पुत्र, सप्तर्षि में से एक; अनसूया के पति तथा दत्तात्रेय, दुर्वासा और चंद्र के पिता।अंगिराब्रह्मा के मानस पुत्र और दिव्य ऋषि; अंगिरस वंश तथा अनेक वैदिक सूक्तों के द्रष्टा।मरीचिब्रह्मा के मानस पुत्र, सप्तर्षि में से एक और कश्यप के पिता।गौतमसप्तर्षि में से एक; अहल्या के पति, जिनके आश्रम में राम ने अहल्या का उद्धार किया।जमदग्निसप्तर्षि में से एक, रेणुका के पति और परशुराम के पिता।भरद्वाजसप्तर्षि में से एक, द्रोणाचार्य के पिता; प्रयाग में उनका प्रसिद्ध आश्रम था।सनत्कुमारब्रह्मा के मानस पुत्र, चार कुमारों में से एक; नित्य बालक रूप में रहने वाले ब्रह्मचारी महर्षि।धन्वंतरिदेवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के देवता, जो समुद्र मंथन से अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए।अश्विनी कुमारसूर्य और संज्ञा के जुड़वाँ पुत्र, देवताओं के वैद्य और प्रभात के दिव्य अश्वसारथी।चित्रगुप्तयमराज के लेखाकार, जो 'अग्रसंधानी' पंजिका में प्रत्येक जीव के पाप-पुण्य का लेखा रखते हैं।शनिसूर्य और छाया के पुत्र, नवग्रहों में कर्म-न्याय के देवता, जिनका वाहन कौआ है।राहुनवग्रहों में छाया-ग्रह, स्वर्भानु का सिर; ग्रहण का कारण माना जाता है।केतुनवग्रहों में छाया-ग्रह, स्वर्भानु का धड़; वैराग्य और मोक्ष से जुड़े ग्रह।नवग्रहनौ ग्रह-देवता — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु।कामधेनुसमुद्र मंथन से निकली इच्छापूर्ति करने वाली दिव्य गाय, समस्त गायों की माता।उच्चैःश्रवासमुद्र मंथन से निकला श्वेत अश्व, जिसे असुरराज बलि ने लिया।ऐरावतसमुद्र मंथन से निकला चार दाँतों वाला श्वेत हाथी, इंद्र का वाहन।मोहिनीसमुद्र मंथन के समय अमृत बाँटने के लिए विष्णु द्वारा धारण किया गया स्त्री-रूप।हलाहलसमुद्र मंथन से निकला प्रथम विष (कालकूट), जिसे शिव ने पीकर नीलकंठ नाम पाया।वासुकिनागराज, जिसे समुद्र मंथन में मंदराचल की रस्सी (नेती) बनाया गया।शेषनागअनंत नागराज, विष्णु के शयन-आसन; सहस्र फणों पर पृथ्वी धारण करने वाले।तक्षकनागराज, कश्यप-कद्रू के पुत्र; राजा परीक्षित को डसने वाले नाग।अरुणसूर्य के सारथि, गरुड़ के ज्येष्ठ भाई; सम्पाति और जटायु के पिता।पृथ्वीपृथ्वी देवी, भूमि का स्वरूप; वसुधा और धरित्री, समस्त प्राणियों की माता।छायासंज्ञा की छाया-स्वरूप, सूर्य की द्वितीय पत्नी; शनि और तपती की माता।संज्ञाविश्वकर्मा की पुत्री, सूर्य की पत्नी; यम, यमुना और वैवस्वत मनु की माता।तपतीसूर्य-छाया की पुत्री, राजा संवरण की पत्नी; कुरुवंश की माता।पृथुविष्णु के अवतार, वेन के पुत्र; पृथ्वी का दोहन करने वाले प्रथम राजा।सगरइक्ष्वाकुवंशी राजा, जिनके साठ हजार पुत्र कपिल के तेज से भस्म हुए।दिलीपसूर्यवंशी राजा, भगीरथ के पिता; वसिष्ठ की नंदिनी की सेवा करने वाले।अजसूर्यवंशी राजा, रघु के पुत्र और दशरथ के पिता; इंदुमती के पति।पुरुययाति और शर्मिष्ठा के पुत्र, चंद्रवंश की पौरव परंपरा के जनक।भरत चक्रवर्तीदुष्यंत और शकुंतला के पुत्र, चक्रवर्ती सम्राट; जिनके नाम पर भारत।इक्ष्वाकुसूर्यवंश के संस्थापक, वैवस्वत मनु के पुत्र; राम के पूर्वज।कुरुसंवरण और तपती के पुत्र, कुरुवंश के प्रवर्तक; कौरव-पांडवों के पूर्वज।प्रतीपकुरुवंशी राजा, शांतनु के पिता और भीष्म के पितामह।कपिलसांख्य दर्शन के प्रवर्तक महर्षि, विष्णु के अवतार; सगर-पुत्रों को भस्म करने वाले।दत्तात्रेयअत्रि और अनुसूया के पुत्र, ब्रह्मा-विष्णु-शिव के संयुक्त अवतार; नाथ परंपरा के आदिगुरु।हयग्रीवविष्णु का अश्व-मुख अवतार; मधु-कैटभ से वेदों को पुनः प्राप्त करने वाले।देवस्वर्ग के निवासी देवगण, इंद्र के नेतृत्व में; असुरों के प्रतिद्वंद्वी।असुरदेवों के प्रतिद्वंद्वी दैत्य-दानव; कश्यप की दिति-दनु से उत्पन्न।नागकश्यप और कद्रू से उत्पन्न सर्प-जाति; पाताल के निवासी, अर्धदिव्य।पार्वतीहिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी, जिन्होंने कठोर तपस्या से शिव को पति रूप में प्राप्त किया।सतीदक्ष की पुत्री और शिव की प्रथम पत्नी, जिन्होंने यज्ञ में शिव के अपमान पर योगाग्नि में देह त्यागी।कार्तिकेयशिव-पार्वती के पुत्र और देवताओं के सेनापति, जिन्होंने तारकासुर का वध किया।कंसमथुरा का अत्याचारी राजा, जिसने पिता को बंदी बनाया और जिसका वध श्रीकृष्ण ने किया।पूतनाकंस द्वारा भेजी गई राक्षसी, जिसने बालक कृष्ण को विषपूर्ण स्तन पिलाना चाहा और मारी गई।कालिययमुना में रहने वाला विषैला सर्प, जिसे बालक कृष्ण ने दमन किया।यशोदानंद की पत्नी और श्रीकृष्ण की पालक माता, जिन्होंने गोकुल में कृष्ण को पाला।नंदगोकुल के गोप-मुखिया और श्रीकृष्ण के पालक पिता, वसुदेव के मित्र।अक्रूरयदुवंशी महाभक्त, जिन्होंने कृष्ण-बलराम को मथुरा ले जाकर कंस-वध का मार्ग बनाया।उद्धवश्रीकृष्ण के परम मित्र और सचिव, जिनके नाम से उद्धव-गीता का उपदेश प्रसिद्ध है।उग्रसेनमथुरा के यदुवंशी राजा, जिन्हें पुत्र कंस ने बंदी बनाकर सिंहासन छीना।सत्राजितयादव सरदार, जिनके पास स्यमंतक मणि थी और जिनकी पुत्री सत्यभामा थी।कालयवनयवन सेनापति, जिसने जरासंध के सहयोग से मथुरा पर चढ़ाई की और मुचुकुंद के हाथों मारा गया।रेवतीराजा रैवत की पुत्री और बलराम की पत्नी, जिनका विवाह बलराम से हुआ।शकुंतलाविश्वामित्र-मेनका की पुत्री, जिनका विवाह राजा दुष्यंत से हुआ और पुत्र भरत हुए।दमयंतीविदर्भ राजकुमारी और राजा नल की पत्नी, जिनकी कथा नल-दमयंती की प्रसिद्ध कथा है।राजा नलनिषध देश के राजा, दमयंती के पति और नल-दमयंती कथा के नायक।सावित्रीअश्वपति की पुत्री, जिन्होंने यम से धर्म-बुद्धि के बल पर पति सत्यवान के प्राण वापस पाए।सत्यवानद्युमत्सेन के पुत्र, जिनकी अल्पायु मृत्यु को पत्नी सावित्री ने यम से लौटाया।शुनःशेपअजीगर्त के पुत्र, जिन्हें हरिश्चंद्र के यज्ञ हेतु विक्रय किया गया और विश्वामित्र की कृपा से मुक्त हुए।ऋष्यशृंगविभाण्डक के पुत्र, जिनके पुत्रेष्टि यज्ञ से राजा दशरथ को पुत्र प्राप्त हुए।विनताकश्यप की पत्नी और गरुड़ व अरुण की माता, जिसे बाज़ी हारने पर कद्रू की दासी बनना पड़ा।बाणासुरबलि का सहस्र-भुजा पुत्र, शिव-भक्त असुरराज, जिसकी पुत्री ऊषा से कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का विवाह हुआ।