द्रोण वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: द्रोणाचार्य वध, द्रोण-वध
युद्ध में द्रोणाचार्य कौरवों के अजेय सेनापति थे। द्रोण पांडवों के गुरु भी थे, इसलिए उनका वध करना पांडवों के लिए कठिन था।
द्रोण को पराजित करने के लिए श्रीकृष्ण ने युक्ति बताई कि द्रोण को यह विश्वास दिलाया जाए कि उनका पुत्र अश्वत्थामा मारा गया है। द्रोण को 'अश्वत्थामा' नामक एक हाथी की मृत्यु का समाचार दिया गया।
द्रोण ने संदेह में युधिष्ठिर से सत्य पूछा, क्योंकि युधिष्ठिर कभी असत्य नहीं बोलते थे। श्रीकृष्ण के संकेत पर युधिष्ठिर ने 'अश्वत्थामा हतः' कहा और मन में 'नरो वा कुञ्जरो वा' (मनुष्य या हाथी) जोड़ा। यह सुनकर द्रोण का मन टूट गया।
पुत्र-शोक और निराशा से द्रोण ने शस्त्र त्याग दिए और रथ से उतरकर ध्यान में बैठ गए। उसी समय द्रुपद के पुत्र धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया। इस घटना से कौरव-सेना नेतृत्व-विहीन हो गई।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: महाभारत – द्रोण पर्व