वराह अवतरण
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: वराह, सूकर अवतार
वराह अवतरण की कथा पृथ्वी-रक्षा की कथा है। हिरण्याक्ष दैत्य ने पृथ्वी को रसातल में छिपा दिया, तब विष्णु ने वराह (सूकर) का रूप धारण किया।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के तृतीय स्कन्ध तथा विष्णु पुराण में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र वराह, हिरण्याक्ष और पृथ्वी हैं।
वराह ने अपने दाँतों पर पृथ्वी को धारण कर उसे ऊपर उठाया और हिरण्याक्ष का वध किया। पृथ्वी पुनः स्थिर हुई और प्राणियों का जीवन सुरक्षित हुआ। यह कथा भगवान की रक्षक शक्ति और धर्म-स्थापना का प्रतीक है।
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – तृतीय स्कन्ध