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शबरी के बेर

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: शबरी, भिलनी शबरी, शबरी का प्रेम

रामायणभक्तिरामशबरी आश्रम

शबरी मतंग ऋषि की शिष्या थी। गुरु के देह त्याग के बाद वे उनकी आज्ञा से श्रीराम की प्रतीक्षा में रहीं और प्रतिदिन राम के आगमन की आशा से पुष्प तथा फल एकत्र करती रहीं। जब राम और लक्ष्मण उनके आश्रम में आए, तब उन्होंने प्रेमवश बेर चख-चखकर देखे कि वे मीठे हैं या नहीं, और तब वे राम को अर्पित किए।

यह प्रसंग रामायण परंपरा में आता है और रामचरितमानस के अरण्य काण्ड में अत्यंत भक्ति-भाव से चित्रित है। वाल्मीकि रामायण में भी राम का शबरी से मिलन वर्णित है।

मुख्य पात्र शबरी, राम, लक्ष्मण और मतंग ऋषि हैं। राम ने शबरी का चखा हुआ फल बिना किसी संकोच के स्वीकार किया और उन्हें ज्ञान देकर मुक्ति प्रदान की। इस कथा का महत्व यह है कि भक्ति में जाति या पद नहीं, निष्कपट प्रेम देखा जाता है; शबरी ने अपनी पवित्र भक्ति से श्रीराम को वश कर लिया।

प्रसिद्ध कथन

श्रीराम ने कहा — 'शबरी! तुम्हारा प्रेम और भक्ति मुझे अत्यंत प्रिय है।' (भावानुवाद)

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स्रोत: रामचरितमानस – अरण्य काण्ड; वाल्मीकि रामायण