त्रिदेव-परीक्षा
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: भृगु की परीक्षा, भृगु और त्रिदेव, त्रिदेवों की परीक्षा
सरस्वती नदी के तट पर ऋषियों का यज्ञ चल रहा था। इस विवाद पर कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में सर्वश्रेष्ठ कौन है, ऋषियों ने ब्रह्मा के मानस-पुत्र भृगु को परीक्षा हेतु भेजा। भृगु ब्रह्मा के पास गए पर उन्हें प्रणाम नहीं किया—ब्रह्मा क्रोधित हुए पर बुद्धि से शांत हो गए। फिर शिव के पास जाकर उनका आलिंगन अस्वीकार किया—शिव क्रोधित हुए, पर पार्वती ने उन्हें शांत किया।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कन्ध में तथा पद्म पुराण में वर्णित है। अंत में भृगु वैकुण्ठ पहुँचे, जहाँ श्रीविष्णु लक्ष्मी की गोद में शयन कर रहे थे।
मुख्य पात्र भृगु, ब्रह्मा, शिव, विष्णु और लक्ष्मी हैं। भृगु ने विष्णु के वक्ष पर पैर से प्रहार किया, पर विष्णु क्रोधित न हुए; वे उठे, भृगु को प्रणाम किया और उनके चरण-जल से अपने वक्ष को पवित्र होने का वरदान दिया। भृगु ने घोषणा की कि तीनों समान हैं, पर केवल विष्णु त्रिगुणातीत तथा पूर्ण सत्त्वगुणी हैं। इस कथा का महत्व यह है कि सच्चा ईश्वरत्व शक्ति नहीं, क्षमा और करुणा में है।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध; पद्म पुराण