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प्रह्लाद कथा

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: प्रह्लाद, भक्त प्रह्लाद

भक्तिविष्णुभागवतदैत्य

प्रह्लाद की कथा भक्ति की महिमा और भगवान की भक्त-रक्षा का प्रसिद्ध उदाहरण है। दैत्यराज हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद जन्म से ही विष्णु का परम भक्त था। पिता ने अनेक बार उसे मारने का प्रयास किया, पर हर बार विष्णु ने उसकी रक्षा की।

यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के सप्तम स्कन्ध में विस्तार से वर्णित है। विष्णु पुराण तथा अन्य पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता है। कथा में प्रह्लाद, हिरण्यकशिपु, उसकी बहन होलिका और नरसिंह अवतार मुख्य पात्र हैं।

अंत में विष्णु ने नरसिंह रूप धारण कर हिरण्यकशिपु का वध किया और प्रह्लाद को बचाया। प्रह्लाद को पिता का राज्य मिला और वह विष्णु का प्रिय भक्त बना। यह कथा बताती है कि भक्त की रक्षा भगवान स्वयं करते हैं। भारत में होलिका दहन की परंपरा भी इसी कथा से जुड़ी है।

प्रसिद्ध कथन

श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्। अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम्॥ (श्रीमद्भागवत पुराण)

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प्रह्लादहिरण्यकशिपुनरसिंह अवतारविष्णु

स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – सप्तम स्कन्ध