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बिहुला

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: बिहुला-विषहरी, सती बिहुला, बेहुला, लखिंदर

लोककथामनसा देवीअंग प्रदेशनागपूजा

यह अंग प्रदेश (आज का बिहार-भागलपुर क्षेत्र) की प्रसिद्ध लोकगाथा है। चंपानगर के धनी वैश्य चांद सदागर परम शिवभक्त थे, पर मनसा (विषहरी) देवी की पूजा को न मानते थे। क्रुद्ध होकर विषहरी ने उनके छह पुत्रों को विवाह की रात सर्पदंश से मरवा डाला। सातवें पुत्र बाला लखिंदर का विवाह बिहुला से हुआ, पर नागिन ने उसे भी डस लिया।

यह कथा मनसा मंगल काव्य तथा अंगिका-भाषी क्षेत्र की लोकगाथा के रूप में प्रचलित है; इसे बिहुला-विषहरी की गाथा भी कहा जाता है।

मुख्य पात्र बिहुला, बाला लखिंदर, चांद सदागर और मनसा (विषहरी) देवी हैं। पतिव्रता बिहुला ने अपने पति के शव को केले के तने की नाव पर रखकर देवलोक/इंद्रलोक तक पहुँचाया और अपनी भक्ति तथा सहनशीलता के बल पर उसे पुनर्जीवित कराया। इस कथा का महत्व यह है कि सती के धैर्य और प्रेम से असंभव भी संभव हो जाता है; इसी गाथा से मनसा-विषहरी पूजा प्रचलित हुई।

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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध (मनसा मंगल काव्य; अंग प्रदेश की लोकगाथा)