पांडवों का वनवास
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: वनवास, द्वादश वर्षीय वनवास
द्यूत-सभा में युधिष्ठिर सब कुछ हार गए और कौरवों ने उन्हें बारह वर्ष का वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास की शर्त दी। इसे स्वीकार कर पांडव द्रौपदी सहित हस्तिनापुर से वन की ओर चले।
वनवास काल में पांडवों ने अनेक तीर्थों की यात्रा की, ऋषि-मुनियों के दर्शन किए और दिव्य अस्त्रों का अभ्यास किया। अर्जुन ने इंद्र आदि देवताओं से दिव्यास्त्र प्राप्त किए और इसी काल में अनेक दिव्य तथा पौराणिक प्रसंग घटे।
इसी काल में भीम ने हिडिंबा से विवाह किया और घटोत्कच का जन्म हुआ; अनेक राक्षसों तथा दुष्टों का वध हुआ। द्रौपदी के साथ अनेक कठिन परीक्षाएँ आईं, जैसे जयद्रथ द्वारा उसका अपहरण।
वनवास पांडवों के धैर्य, एकता और तप की परीक्षा थी। इसका उद्देश्य उन्हें राज्य से दूर रखना था, पर वनवास से लौटे पांडव और अधिक दृढ़ होकर अपना अधिकार माँगने के लिए तैयार हुए।
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स्रोत: महाभारत – वन पर्व