विभीषण शरणागति
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: विभीषण की शरण, शरणागत वत्सल
लंका में विभीषण रावण का छोटा भाई था, पर स्वभाव से धर्मात्मा और राम-भक्त। जब हनुमान का सन्देश और सेतु-निर्माण का समाचार मिला, तब विभीषण ने रावण को सीता लौटाकर राम से संधि करने की सलाह दी।
रावण ने क्रुद्ध होकर विभीषण को अपमानित किया और दरबार से अपमानपूर्वक निकाल दिया। तब विभीषण अपने चार मंत्रियों सहित समुद्र पार कर राम की शरण में चला आया।
राम के दरबार में शरणागत को स्वीकार करने पर विचार हुआ। सुग्रीव आदि को संदेह था, पर राम ने कहा कि शरण में आए शत्रु को भी नहीं त्यागना चाहिए; उन्होंने विभीषण को अपने वचन से अभय कर दिया।
विभीषण ने रावण की सेना, योजनाओं और लंका के रहस्यों की जानकारी देकर राम की विजय में सहायता की। युद्ध के बाद राम ने विभीषण को लंका का राज्य सौंपा। यह प्रसंग शरणागति और धर्म-पक्ष के महत्व को दर्शाता है।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड