त्रिहारिणी
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: वेदवती, त्रिहारिणी देवी, वेदवती-सीता-द्रौपदी
त्रिहारिणी वह दिव्य नारी हैं जिन्होंने तीन जन्म धारण किए। पहले जन्म में वे कुशध्वज की पुत्री वेदवती हुईं, जिन्होंने घोर तप किया। रावण ने जब उन्हें बलपूर्वक वश करना चाहा, तब उन्होंने उसे वंश-सहित नष्ट होने का शाप दिया और अग्नि में देह त्याग दी।
यह कथा परंपरा में वर्णित है, जहाँ वेदवती का रावण-वृत्तांत और फिर सीता तथा द्रौपदी के रूप में उनका पुनर्जन्म जुड़ा है। इस आख्यान का उल्लेख देवी-परंपरा तथा रामायण-संबंधी आख्यानों में मिलता है।
मुख्य पात्र वेदवती, रावण, सीता और द्रौपदी हैं। त्रेतायुग में वही वेदवती सीता के रूप में जन्मीं, और रावण का कुल उनके कारण नष्ट हुआ। द्वापर में उन्होंने द्रौपदी के रूप में जन्म लिया। इस प्रकार वेदवती, सीता और द्रौपदी—तीन जन्मों के कारण वे त्रिहारिणी कहलाईं। इस कथा का महत्व यह है कि यह दिव्य स्त्री-शक्ति के तीन रूपों और पापियों के विनाश की कथा प्रस्तुत करती है।
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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध