शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

वसु

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: अष्टवसु, वसुओं का शाप, द्यु वसु, प्रभास वसु

महाभारतआदि पर्ववसिष्ठभीष्म

द्यु (प्रभास) आदि आठ वसु देवता थे। अपनी पत्नियों के आग्रह पर उन्होंने वसिष्ठ ऋषि की कामधेनु (नंदिनी) गाय को चुरा लिया। दिव्यदृष्टि से यह जानकर वसिष्ठ ने क्रोधित होकर उन्हें शाप दिया कि तुम सब मनुष्य-योनि में जन्म लो।

यह कथा महाभारत के आदि पर्व में गंगा-शांतनु तथा भीष्म के जन्म के प्रसंग में वर्णित है। वसुओं के प्रार्थना करने पर वसिष्ठ ने कहा कि सात वसु जन्म लेते ही मुक्त हो जाएँगे, पर द्यु को दीर्घकाल तक मनुष्य रूप में रहना पड़ेगा।

मुख्य पात्र वसिष्ठ, आठ वसु, गंगा और शांतनु हैं। गंगा ने सात पुत्रों को जन्म लेते ही जल में प्रवाहित कर मुक्त किया, और आठवें पुत्र देवव्रत को जीवनदान दिया। वही देवव्रत आगे भीष्म के रूप में प्रसिद्ध हुए। इस कथा का महत्व यह है कि देवता भी कर्म-फल से बंधे हैं और अपराध का दंड सबको भोगना पड़ता है।

संबंधित

गंगाभीष्मशांतनुवसिष्ठ

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व