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कुवलयापीड़

कथाएँ एवं घटनाएँ

कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम को मारने के लिए रंगभूमि के द्वार पर कुवलयापीड़ नामक विशाल और मदोन्मत्त हाथी तैनात कर रखा था, जिसे महावत बार-बार उभारते रहते थे।

यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कन्ध में वर्णित है। रंगभूमि के द्वार पर पहुँचकर कृष्ण ने देखा कि महावत की प्रेरणा से वह हाथी उनकी ओर दौड़ रहा है।

मुख्य पात्र कृष्ण, बलराम और हाथी कुवलयापीड़ हैं। श्रीकृष्ण ने सावधानी से उसकी सूँड पकड़कर उसे पटक दिया और उसके दाँत तोड़कर उसका वध किया; फिर उसी हाथी-दाँत से महावत को भी परास्त किया। इसके बाद वे अखाड़े में प्रवेश करके चाणूर-मुष्टिक से लड़े। कथा का महत्व यह है कि भगवान बाल्यावस्था में ही अत्यंत बलशाली और निर्भय हैं, और उनके मार्ग की कोई बाधा टिक नहीं सकती।

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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध