पंचकन्या
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: पांच कन्याएँ, अहल्या द्रौपदी कुंती तारा मंदोदरी
पंचकन्या का अर्थ है पाँच पुण्यशालिनी स्त्रियाँ, जिनका नाम स्मरण करने मात्र से महापाप नष्ट होते हैं। इनमें अहल्या, द्रौपदी, कुंती, तारा और मंदोदरी गिनी जाती हैं। ये सब धर्म, धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति मानी गई हैं और प्रत्येक के जीवन में कोई-न-कोई महान परीक्षा अथवा गूढ़ रहस्य जुड़ा है।
यह स्तुति परंपरा में प्रचलित है और पुराणों, महाभारत तथा रामायण के पात्रों से जुड़ी है। इसे परंपरा-प्रसिद्ध कहा जाता है, क्योंकि पंचकन्या का स्मरण-श्लोक लोक-परंपरा में जन-जन में प्रचलित है।
मुख्य पात्र अहल्या, द्रौपदी, कुंती, तारा और मंदोदरी हैं। अहल्या गौतम ऋषि की पत्नी, द्रौपदी पांडवों की महारानी, कुंती पांडवों की माता, तारा वानरराज बालि की पत्नी और मंदोदरी रावण की पत्नी थीं। इस स्तुति का महत्व यह है कि इन दिव्य स्त्रियों का नाम-स्मरण भक्त को पापों से मुक्त करता है और धर्म-पथ पर बल देता है।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध