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दशरथ मृत्यु

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: दशरथ का देहावसान, श्रवण शाप

अयोध्याकाण्डश्रवण कुमारपुत्र-वियोगशाप

राम, सीता और लक्ष्मण के वन चले जाने के बाद राजा दशरथ पुत्र-वियोग से व्याकुल और शोकाकुल हो गए। उन्हें न अन्न में रुचि रही, न निद्रा में।

उन्हें अपने युवावस्था के पूर्वकर्म की स्मृति हुई। एक बार शिकार करते हुए उन्होंने भूलवश श्रवण कुमार को बाण मार दिया था, जो अपने अंधे वृद्ध माता-पिता को कावड़ में लेकर जल भरने जा रहा था। श्रवण के माता-पिता ने शोक-विह्वल होकर उन्हें शाप दिया था कि जैसे हम पुत्र-वियोग में मर रहे हैं, वैसे ही तुम्हारी भी पुत्र-वियोग में मृत्यु होगी।

उसी रात्रि स्मृति और शोक में डूबे दशरथ का देहांत हो गया। रानियाँ कौशल्या और सुमित्रा स्तब्ध रह गईं। राज्य निराश्रित हो गया और भरत को बुलाने के लिए दूत भेजे गए।

यह प्रसंग कर्म-सिद्धांत और पितृवचन के कठोर परिणाम को दर्शाता है — राजा होकर भी दशरथ अपने कर्म के फल से नहीं बच सके।

प्रसिद्ध कथन

दशरथ ने श्रवण के माता-पिता का शाप स्मरण किया — 'पुत्र-वियोग में ही तेरी मृत्यु होगी।' (भावानुवाद)

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दशरथश्रीरामकैकेयीकौशल्यासुमित्राभरत

स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अयोध्याकाण्ड