श्वेतकेतु
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: श्वेतकेतु
श्वेतकेतु की कथा आत्मज्ञान और एकत्व की कथा है। ऋषि उद्दालक आरुणि के पुत्र श्वेतकेतु को जब अहंकार हुआ, तब पिता ने उसे ब्रह्म-ज्ञान का उपदेश दिया।
यह कथा छांदोग्य उपनिषद् में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र श्वेतकेतु, उद्दालक आरुणि और प्रवाहण जैबलि हैं।
पिता ने तत् त्वम् असि (वह तुम हो) का महावाक्य कहकर बताया कि आत्मा ही ब्रह्म है। श्वेतकेतु को राजा प्रवाहण से भी ज्ञान मिला। यह कथा अद्वैत आत्मज्ञान और तत् त्वम् असि महावाक्य का आधार मानी जाती है।
प्रसिद्ध कथन
तत् त्वम् असि (छांदोग्य उपनिषद्)
संबंधित
स्रोत: छांदोग्य उपनिषद्