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शिव-अर्जुन युद्ध

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: किरात-अर्जुन युद्ध, अर्जुन और किरात, पाशुपतास्त्र प्राप्ति

महाभारतवन पर्वशिवअर्जुनपाशुपतास्त्र

वनवास के समय अर्जुन ने दिव्यास्त्रों की प्राप्ति हेतु इंद्रकील पर्वत पर शिव की घोर तपस्या की। उनकी परीक्षा लेने के लिए शिव किरात (व्याध) का वेश धारण कर आए। एक दैत्य-रूप वराह पर दोनों के बाण एक साथ लगे और दोनों में अस्त्र-युद्ध छिड़ गया। अंत में शिव ने अपना वास्तविक रूप प्रकट किया।

यह प्रसंग महाभारत के वन पर्व के किरातार्जुनीय प्रसंग में वर्णित है। इसमें शिव की कृपा से अर्जुन को पाशुपतास्त्र सहित अनेक दिव्य अस्त्र प्राप्त हुए।

मुख्य पात्र अर्जुन, शिव, पार्वती और देवता हैं। अर्जुन की तपस्या, विनय और पराक्रम से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें पाशुपतास्त्र दिया, जिसने आगे कुरुक्षेत्र युद्ध में उन्हें अजेय बनाया। इस कथा का महत्व यह है कि भक्ति, परिश्रम और गुरु-कृपा से ही दिव्य शक्ति प्राप्त होती है।

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स्रोत: महाभारत – वन पर्व (किरातार्जुनीय)