यक्ष प्रश्न
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: यक्ष-युधिष्ठिर संवाद, यक्षयुद्ध
वनवास के दौरान एक ब्राह्मण का अरणी-दंड हरिण की टक्कर से जंगल में चला गया। उसे ढूँढ़ते हुए पाँचों पांडव एक सरोवर के किनारे पहुँचे।
सरोवर का जल पीने से पहले एक अदृश्य यक्ष (जो वस्तुतः यमराज थे) ने चेतावनी दी। प्यास से व्याकुल नकुल, सहदेव, अर्जुन और भीम ने चेतावनी न मानी और जल पीकर मूर्छित होकर प्राण त्याग दिए।
अंत में युधिष्ठिर पहुँचे। यक्ष ने उनसे कहा कि पहले उसके प्रश्नों का उत्तर दो, तभी जल पी सकोगे। यक्ष ने धर्म, जीवन, मृत्यु, काल, मन, बुद्धि आदि पर अनेक गूढ़ प्रश्न पूछे, जिनका युधिष्ठिर ने विवेकपूर्ण उत्तर दिया।
युधिष्ठिर के उत्तरों से प्रसन्न होकर यक्ष ने उन्हें वर दिया। युधिष्ठिर ने क्रमशः सभी भाइयों को जीवित कराने का वर माँगा। तब यक्ष ने अपना यमरूप प्रकट किया और युधिष्ठिर को धर्मात्मा बताकर चारों भाइयों को जीवित कर दिया।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: महाभारत – वन पर्व