भरत मिलाप
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: चित्रकूट भरत मिलाप, भरत-पादुका
भरत जब मामा के घर से अयोध्या लौटे तो उन्हें पिता की मृत्यु और राम के वनवास का समाचार मिला। उन्होंने कैकेयी की मंशा जानकर राज्य लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
वे समस्त अयोध्यावासियों, मंत्रियों और माताओं के साथ राम को वापस लाने हेतु चित्रकूट पहुँचे। दूर से ही भाई-भाई के दर्शन होते ही प्रेम और शोक से सब व्याकुल हो गए।
भरत ने चरण पकड़कर राम से अयोध्या लौटने और राज्य स्वीकारने की प्रार्थना की, पर राम ने पिता का वचन निभाने के लिए वनवास पूरा करने का निश्चय दोहराया। तब भरत ने राम की चरण-पादुका माँगी।
राम ने पादुका प्रदान कीं और भरत उन्हें सिर पर रखकर अयोध्या लौटे। उन्होंने स्वयं राजा बनने के बजाय नंदिग्राम में तपस्वी-वेश में रहकर पादुका को सिंहासन पर स्थापित कर राज्य-संचालन किया। यह प्रसंग भ्रातृ-प्रेम और निष्काम सेवा का उच्चतम उदाहरण है।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अयोध्याकाण्ड