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शुनःशेप कथा

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: शुनःशेप, देवरात

स्तुतियज्ञऋषिब्राह्मण

शुनःशेप की कथा स्तुति और दया की कथा है। राजा हरिश्चंद्र को पुत्र-प्राप्ति के लिए वरुण देवता को यज्ञ-पशु का वचन देना पड़ा, पर पुत्र रोहित ने यज्ञ से इनकार किया। तब ऋषि अजीगर्त ने अपने पुत्र शुनःशेप को सौ गायों के बदले बेच दिया।

यह कथा ऐतरेय ब्राह्मण तथा श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र शुनःशेप, अजीगर्त, हरिश्चंद्र, रोहित और विश्वामित्र हैं।

यज्ञ-वेदी पर बाँधे जाने पर शुनःशेप ने देवताओं की स्तुति की और बंधन से मुक्त हो गया। विश्वामित्र ने उसे पुत्र रूप में अपनाकर देवरात नाम दिया। यह कथा वेदों की प्रसिद्ध स्तुतियों से जुड़ी है और ऋषि बनने की प्रेरणा देती है।

प्रसिद्ध कथन

शुनःशेप ने स्तुति की – हे देवताओ, मैं बंधन में हूँ, मुझे मुक्त कीजिए। (भावानुवाद)

संबंधित

शुनःशेपविश्वामित्रहरिश्चंद्रवरुण

स्रोत: ऐतरेय ब्राह्मण