पांचजन्य
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: पाञ्चजन्य, पांचजन्य शंख, शंखासुर
श्रीकृष्ण और बलराम ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में विद्या पूर्ण की और गुरु-दक्षिणा देने का आग्रह किया। गुरु ने कहा कि उनका पुत्र समुद्र में डूबकर मर गया है, उसे लौटा दो। तब दोनों समुद्र-तट पर गए, जहाँ सागर ने बताया कि पंचजन (शंखासुर) नामक दैत्य ने बालक को निगल लिया है।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कन्ध में तथा हरिवंश पुराण में वर्णित है। श्रीकृष्ण ने पंचजन का वध किया और उसके शरीर से निकला शंख अपने पास रख लिया, जो पांचजन्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
मुख्य पात्र श्रीकृष्ण, बलराम, गुरु सांदीपनि, पंचजन और यमराज हैं। यमलोक जाकर श्रीकृष्ण ने गुरु-पुत्र को वापस लाया और गुरु को समर्पित किया। यही पांचजन्य शंख आगे कुरुक्षेत्र युद्ध में श्रीकृष्ण ने बजाया। इस कथा का महत्व यह है कि गुरु-दक्षिणा और गुरु-भक्ति का आदर्श प्रस्तुत होता है, तथा पांचजन्य शंख धर्म-विजय का प्रतीक बनता है।
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध; हरिवंश पुराण