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नल-दमयंती कथा

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: नल, दमयंती

महाभारतप्रेमस्वयंवरवियोग

नल-दमयंती की कथा प्रेम, परीक्षा और पुनर्मिलन की प्रसिद्ध कथा है। निषध देश के राजा नल और विदर्भ राजकुमारी दमयंती एक-दूसरे से प्रेम करते थे; देवता भी दमयंती से विवाह चाहते थे।

यह कथा महाभारत के वन पर्व तथा नैषधीयचरित जैसे ग्रंथों में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र नल, दमयंती, कलि (कलियुग), देवर्षि नारद और बाहुक (नल का छद्म रूप) हैं।

स्वयंवर में दमयंती ने नल को वरा। कलि के प्रभाव से नल को जुए में राज्य गँवाना पड़ा और दोनों बिछड़ गए। अनेक कठिनाइयों के बाद अश्वविद्या और बुद्धि से नल ने दमयंती को पहचाना और दोनों पुनः मिले। यह कथा धैर्य, विश्वास और पतिव्रता के महत्व को दर्शाती है।

प्रसिद्ध कथन

दमयंती ने कहा – हे नल, मैंने देवताओं को छोड़कर तुम्हें वरा है। (भावानुवाद)

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स्रोत: महाभारत – वन पर्व (नलोपाख्यान)