मदालसा
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: मदालसा का उपदेश, जड़संवाद, ऋतध्वज की रानी
मदालसा गंधर्वराज विश्वावसु की पुत्री तथा राजा ऋतध्वज की पटरानी थीं। वे ब्रह्मज्ञानी और अनासक्त थीं। पुत्रों को झुलाते समय वे ब्रह्मज्ञान के गीत गाती थीं, जिन्हें सुनकर उनके पुत्र बचपन से ही वैराग्य और आत्मज्ञान की ओर प्रवृत्त हो गए।
यह कथा मार्कण्डेय पुराण के मदालसा-चरित तथा जड़संवाद में विस्तार से वर्णित है। महाकवि त्रिविक्रमभट्ट ने इसी पर मदालसा चंपू की रचना की।
मुख्य पात्र मदालसा, ऋतध्वज और उनके पुत्र विक्रांत, सुबाहु, अरिमर्दन तथा अलर्क हैं। पहले तीन पुत्र माता के उपदेश से विरक्त होकर संन्यासी बन गए; चौथे पुत्र अलर्क को पति के अनुरोध पर मदालसा ने राजधर्म सिखाया और उसके लिए स्वर्ण-अंगूठी में गूढ़ संदेश छिपाया। इस कथा का महत्व यह है कि मदालसा आदर्श माता हैं, जिन्होंने संतान को भोग नहीं, मुक्ति का मार्ग दिखाया।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: मार्कण्डेय पुराण