नरसिंह अवतरण
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: नरसिंह, नृसिंह
नरसिंह अवतरण की कथा भक्त-रक्षा की सबसे प्रसिद्ध कथा है। हिरण्यकशिपु को वरदान मिला था कि न मनुष्य न पशु, न दिन न रात, न भीतर न बाहर उसका वध नहीं होगा।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के सप्तम स्कन्ध में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र हिरण्यकशिपु, प्रह्लाद और नरसिंह हैं।
संध्या के समय, देहली पर, विष्णु ने आधे नर और आधे सिंह का रूप धारण कर हिरण्यकशिपु को मार डाला, जिससे सारे वरदान व्यर्थ हो गए। यह कथा बताती है कि भगवान की लीला और भक्त की रक्षा सभी सीमाओं से परे है।
प्रसिद्ध कथन
हिरण्यकशिपु ने पूछा – तुम कहाँ से आए हो? नरसिंह ने कहा – जहाँ से तुम्हें मारने आया हूँ। (भावानुवाद)
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – सप्तम स्कन्ध