युधिष्ठिर राज्याभिषेक
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: युधिष्ठिर का राजतिलक, राज्याभिषेक
युद्ध और दाह-संस्कार के बाद पांडव हस्तिनापुर लौटे। युद्ध में हुए विनाश से युधिष्ठिर का मन अत्यंत व्यथित था; वे राज्य लेने को तैयार नहीं थे।
धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती, विदुर और व्यास आदि के समझाने तथा श्रीकृष्ण के परामर्श से युधिष्ठिर ने राज्य-भार स्वीकार किया।
मृत योद्धाओं के श्राद्ध और जलांजलि के बाद युधिष्ठिर का हस्तिनापुर के राजा के रूप में विधिवत राज्याभिषेक हुआ। इस अवसर पर धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती और शेष वृद्धों तथा ऋषियों ने उनका आशीर्वाद दिया।
युधिष्ठिर ने धृतराष्ट्र और गांधारी का सम्मान बनाए रखा और राज्य-कार्यों में विदुर तथा संजय आदि की सेवाएँ स्वीकार कीं। यह राज्याभिषेक स्त्री पर्व के अंत में तथा शांति पर्व के आरंभ में वर्णित है, जिसके बाद भीष्म ने युधिष्ठिर को राजधर्म का उपदेश दिया।
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स्रोत: महाभारत – स्त्री पर्व, शांति पर्व