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तिरुपति में विष्णु

कथाएँ एवं घटनाएँ

तिरुमल पर्वत पर भगवान वेंकटेश्वर (श्रीनिवास) के प्रकट होने की कथा वराह पुराण तथा वेंकटाचल महात्म्य में वर्णित है। कहा जाता है कि आदि वराह भगवान स्वामी पुष्करिणी के पश्चिमी तट पर प्रकट हुए, और वेंकटेश्वर रूप में विष्णु उसके दक्षिणी तट पर निवास करने लगे।

एक प्रसिद्ध प्रसंग के अनुसार आदिशेष और वायुदेव में श्रेष्ठता को लेकर संघर्ष हुआ; उसे शांत करने के लिए भगवान ने वेंकटाद्रि पर वेंकटेश्वर रूप में अवतार लेने का वरदान दिया। श्रीनिवास ने पद्मावती (अलमेलु मंगा) से विवाह किया।

विवाह के लिए धन की आवश्यकता पड़ी तो श्रीनिवास ने धनपति कुबेर से ऋण लिया, जिसे चुकाने के लिए वे आज भी वेंकटाद्रि पर निवास करते हैं और भक्तों के अर्पण से वह ऋण चुकता होता है। इसीलिए यह मान्यता है कि तिरुपति में जो भी श्रद्धा से चढ़ावा चढ़ाता है, भगवान उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। कथा का महत्व यह है कि भगवान भक्त के ऋण के बंधन में बँधकर भी उसकी रक्षा और कल्याण करते हैं।

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स्रोत: वराह पुराण – वेंकटाचल महात्म्य; परंपरा-प्रसिद्ध