चक्रव्यूह
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: चक्रव्यूह रचना, पद्मव्यूह
युद्ध के तेरहवें दिन द्रोणाचार्य ने पांडव-सेना को बाँधने के लिए चक्रव्यूह (पद्मव्यूह) की रचना की। यह एक भँवर जैसा व्यूह था, जिसमें प्रवेश करना कठिन और बाहर निकलना और भी कठिन था।
द्रोण का उद्देश्य अर्जुन को युद्ध से दूर रखना था, क्योंकि उस दिन संशप्तकों ने अर्जुन को युद्ध में उलझा दिया था। अर्जुन के अभाव में चक्रव्यूह भेदने की विद्या अभिमन्यु को आती थी।
अभिमन्यु को चक्रव्यूह में प्रवेश करने की विद्या आती थी, पर उसमें से बाहर निकलने की विद्या नहीं आती थी। युधिष्ठिर आदि के कहने पर अभिमन्यु ने अकेले व्यूह में प्रवेश किया।
युधिष्ठिर आदि पांडव जयद्रथ के रोकाव के कारण उसका अनुसरण नहीं कर सके और अभिमन्यु व्यूह के भीतर अकेला फँस गया। यहीं आगे अभिमन्यु के वध का प्रसंग घटित हुआ।
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स्रोत: महाभारत – द्रोण पर्व