नचिकेता कथा
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: नचिकेता
नचिकेता की कथा आत्मज्ञान और सत्य की खोज की प्रसिद्ध कथा है। ऋषि वाजश्रवा के पुत्र नचिकेता ने अपने पिता के यज्ञ में दी जाने वाली दुर्बल गायों को देखकर प्रश्न किया, और पिता के क्रोध में कहे वचन को सत्य मानकर स्वयं यमलोक चला गया।
यह कथा कठोपनिषद् में वर्णित है, जो कृष्ण यजुर्वेद का भाग है। कथा के मुख्य पात्र नचिकेता और यमराज हैं।
तीन दिन यमराज के द्वार पर प्रतीक्षा करने पर यमराज ने प्रसन्न होकर तीन वरदान दिए। नचिकेता ने तीसरे वरदान में मृत्यु के पश्चात् आत्मा की स्थिति का ज्ञान माँगा। यमराज ने आत्मा, ब्रह्म और परमात्मा का ज्ञान दिया। यह कथा भारतीय दर्शन में आत्मज्ञान का आधार मानी जाती है।
प्रसिद्ध कथन
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत (कठोपनिषद्)
नचिकेता का प्रश्न – हे यमराज, मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? (भावानुवाद)
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स्रोत: कठोपनिषद्