चंद्र-तारा कथा
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: चंद्र, तारा
चंद्र-तारा की कथा चंद्रमा के आचार-भंग और बुध के जन्म की कथा है। देवगुरु बृहस्पति की पत्नी तारा से चंद्रमा का संबंध हुआ।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के नवम स्कन्ध तथा विष्णु पुराण में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र चंद्रमा, तारा, बृहस्पति और बुध हैं।
तारा से बुध का जन्म हुआ, जिसे बृहस्पति ने अपना पुत्र नहीं माना। ब्रह्मा के पूछने पर तारा ने सत्य बताया और बुध को चंद्रमा का पुत्र माना गया। चंद्रमा ने गुरु का अपमान किया, जिससे देव-दैत्यों के बीच संघर्ष भी जुड़ा। यह कथा नैतिक आचरण और कर्म के फल को दर्शाती है।
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – नवम स्कन्ध