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परंतप

कथाएँ एवं घटनाएँ

परंतप वत्स देश की राजधानी कौशांबी के प्रतापी राजा थे, जिन्हें पुराणों में शतानीक के नाम से भी जाना जाता है। उनके राज्य में सुख और समृद्धि व्याप्त थी।

यह आख्यान परंपरा-प्रसिद्ध है और वत्स-राजवंश की कथाओं से जुड़ा है। एक दिन राजा अपनी गर्भवती महारानी के साथ धूप सेवन कर रहे थे, तभी 'हत्थी-लिंग' नामक एक विशाल पक्षी मांस का टुकड़ा समझकर रानी को आकाश में उठा ले गया।

मुख्य पात्र राजा परंतप, उनकी रानी और पुत्र उदयन हैं। पक्षी ने रानी को एक पर्वत के वृक्ष पर रख दिया, जहाँ पास रहने वाले तापस ने उसकी सहायता की और वहीं उदयन का जन्म हुआ। तापस ने उदयन को हस्ति-विद्या आदि कलाएँ सिखाईं; बड़े होकर उदयन ने अपने पिता का राज्य प्राप्त किया। कथा का महत्व यह है कि भाग्य के कठिन मोड़ों में भी सत्पुरुषों की सहायता और धैर्य से मनुष्य अपना स्थान पुनः पा लेता है।

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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध (वत्स-कौशांबी परंपरा)