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भरथरी

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: राजा भरथरी, भर्तृहरि, भरथरी लोकगाथा, गोरखनाथ का शिष्य

नाथ संप्रदायवैराग्यलोकगाथाउज्जैन

भरथरी उज्जैन के राजा थे और माना जाता है कि गुरु गोरखनाथ के वे प्रथम शिष्य थे। जन्म के समय ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि वे योगी बनेंगे। जीवन की अनित्यता और संसार-मोह के कारण उनके मन में वैराग्य जगा और उन्होंने राजपाट छोड़कर नाथ-योग का मार्ग अपनाया।

यह कथा नाथ संप्रदाय की परंपरा में प्रचलित है और भरथरी-गोपीचंद की लोकगाथा के रूप में बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल तथा छत्तीसगढ़ में गाई जाती है। यह परंपरा-प्रसिद्ध कथा है।

मुख्य पात्र भरथरी, उनकी पत्नी, भांजा गोपीचंद और गुरु गोरखनाथ हैं। कथा के अंत में गोरखनाथ की कृपा से भरथरी सच्चे योगी बनते हैं। इस कथा का महत्व यह है कि सांसारिक सुख अनित्य हैं और सच्चा सुख वैराग्य तथा योग-साधना में है।

स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध (नाथ संप्रदाय)