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सहस्रबाहु और परशुराम

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: सहस्रार्जुन वध, कार्तवीर्य अर्जुन वध, परशुराम और सहस्रबाहु

विष्णु पुराणपरशुरामहैहयक्षत्रिय वध

हैहय वंश के राजा कार्तवीर्य अर्जुन को सहस्रबाहु या सहस्रार्जुन कहा जाता था, क्योंकि उनके हजार भुजाएँ थीं। एक बार उन्होंने जमदग्नि ऋषि के आश्रम से कामधेनु की बछिया छीन ली और आश्रम को उजाड़ दिया। इस अपराध के कारण जमदग्नि के पुत्र परशुराम ने उन्हें युद्ध में मार डाला।

यह कथा विष्णु पुराण तथा महाभारत की परशुराम-कथा में वर्णित है, जहाँ परशुराम को विष्णु का आवेशावतार बताया गया है।

मुख्य पात्र परशुराम, उनके पिता जमदग्नि, कार्तवीर्य अर्जुन और हैहय वंश के राजा हैं। कार्तवीर्य के पुत्रों ने बदले में जमदग्नि की हत्या कर दी, जिससे क्रुद्ध होकर परशुराम ने पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय-विहीन करने का संकल्प लिया। इस कथा का महत्व यह है कि धर्मात्माओं का उत्पीड़न अंततः विनाशकारी होता है और अत्याचार का दंड अवश्य मिलता है।

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स्रोत: विष्णु पुराण