ध्रुव कथा
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: ध्रुव, बाल ध्रुव
ध्रुव की कथा बालक की दृढ़ भक्ति और तप की महिमा बताती है। राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को सौतेली माँ सुरुचि ने गोद से उतार दिया, तब पाँच वर्ष की आयु में ही वह वन में जाकर विष्णु की तपस्या करने चला गया।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के चतुर्थ स्कन्ध तथा विष्णु पुराण में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र ध्रुव, उनके पिता उत्तानपाद, माता सुनीति, सौतेली माँ सुरुचि और देवर्षि नारद हैं।
नारद के उपदेश से ध्रुव ने घोर तप किया और विष्णु ने प्रसन्न होकर उसे अचल ध्रुवलोक दिया। ध्रुव अंत में राजा बने और मृत्यु के बाद ध्रुव तारा के रूप में स्थित हुए। यह कथा बताती है कि छोटी आयु या कठिनाई भक्ति में बाधा नहीं बनती।
प्रसिद्ध कथन
नारद ने ध्रुव को मंत्र दिया – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (श्रीमद्भागवत पुराण)
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – चतुर्थ स्कन्ध