कौस्तुभ मणि
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: कौस्तुभ, कौस्तुभ रत्न, समुद्र मंथन रत्न
देवताओं और असुरों ने अमृत की प्राप्ति हेतु क्षीरसागर का मंथन किया। इस मंथन से चौदह रत्न प्रकट हुए, जिनमें कौस्तुभ मणि भी थी। यह अत्यंत कांतिमान और दिव्य मणि थी, जिसे स्वयं भगवान विष्णु ने अपने वक्षस्थल पर धारण किया।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध तथा महाभारत के आदि पर्व में समुद्र-मंथन के प्रसंग में वर्णित है। कालिदास के रघुवंश में भी एक परंपरा का उल्लेख है कि कालिय नाग ने श्रीकृष्ण को यह मणि दी थी।
मुख्य पात्र विष्णु, देवता, असुर, धन्वंतरि और लक्ष्मी हैं। कौस्तुभ के साथ ही समुद्र से लक्ष्मी, चंद्रमा, कल्पवृक्ष, ऐरावत, उच्चैःश्रवा तथा अमृत प्रकट हुए। इस कथा का महत्व यह है कि दिव्य ऐश्वर्य सर्वोच्च सत्ता (विष्णु) के साथ ही शोभा पाता है; यह भक्तों के लिए मंगल और कल्याण का प्रतीक माना जाता है।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – अष्टम स्कन्ध; महाभारत – आदि पर्व