सीता त्याग
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: सीता का परित्याग, वाल्मीकि आश्रम
राज्याभिषेक के बाद रामराज्य में सुख शांति थी, पर लंका-प्रवास के कारण सीता की चरित्र-शुद्धि पर कुछ प्रजाजन आपत्ति उठाने लगे और निंदा करने लगे।
राजा के रूप में प्रजा की दृष्टि में निर्दोष रहने के कर्तव्य को सर्वोपरि मानकर राम ने अत्यंत दुःख के साथ सीता का परित्याग करने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके लिए भी अत्यंत कठिन था।
राम ने लक्ष्मण को सीता को सुरक्षित स्थान पर छोड़ आने की आज्ञा दी। लक्ष्मण ने शोकाकुल होकर सीता को वन में ले जाकर वाल्मीकि मुनि के आश्रम के निकट छोड़ दिया।
वाल्मीकि ने सीता को शरण दी और उन्हें आश्रम में आश्रय दिया। वहीं सीता ने लव और कुश को जन्म दिया, जो आगे चलकर वाल्मीकि-रचित रामायण के गायक बने। यह प्रसंग राजधर्म और व्यक्तिगत दुःख के टकराव का दुःखद उदाहरण है।
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – उत्तरकाण्ड