अभिमन्यु वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: अभिमन्यु का वध, अभिमन्यु-वध
चक्रव्यूह के भीतर अकेले फँसे अभिमन्यु, जो अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र तथा युद्ध के समय मात्र सोलह वर्ष के थे, ने अद्भुत पराक्रम दिखाया।
अभिमन्यु ने अकेले ही दुर्योधन, कर्ण, द्रोण, कृपाचार्य, दुशासन, जयद्रथ आदि अनेक महारथियों को युद्ध में चुनौती दी और उन्हें संकट में डाला। उसने कई योद्धाओं के रथ, ध्वज और धनुष काट डाले।
अभिमन्यु को पराजित न देखकर कौरव योद्धाओं ने मिलकर उस पर चारों ओर से आक्रमण किया। द्रोण के निर्देश पर कर्ण ने पीछे से उसका धनुष काटा, दुशासन ने घोड़े मारे और जयद्रथ ने उसका रास्ता रोका।
इस प्रकार धर्म-विरुद्ध सामूहिक आक्रमण से अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हुआ। उसके वध से पांडव अत्यंत दुखी हुए और अर्जुन ने अगले दिन जयद्रथ-वध की भीषण प्रतिज्ञा की।
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स्रोत: महाभारत – द्रोण पर्व