राम-रावण युद्ध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: लंका युद्ध, रावण वध
सेतु पार करके राम की वानर-भालू सेना ने लंका को घेर लिया। विभीषण के सहयोग से युद्ध आरंभ हुआ और दोनों पक्षों में भीषण संग्राम हुआ।
युद्ध में रावण के अनेक शूरवीर मारे गए। रावण के महापराक्रमी भाई कुंभकरण ने राम की सेना पर प्रलयकारी आक्रमण किया, पर अंततः राम ने उसका वध किया। रावण का पुत्र मेघनाद (इंद्रजित) भी निकुंभिला यज्ञ करके अदृश्य होकर युद्ध करता रहा; लक्ष्मण ने उसे मार गिराया।
युद्ध के मध्य लक्ष्मण रावण की शक्ति से मूर्च्छित हो गए। तब हनुमान संजीवनी लाने के लिए चले और पूरा पर्वत ही उठाकर लाए, जिससे लक्ष्मण को प्राण मिले।
अंत में राम और रावण का आमना-सामना हुआ। राम ने आदित्य-हृदय स्तोत्र का पाठ करते हुए अगस्त्य-दत्त दिव्य बाण (ब्रह्मास्त्र) से रावण का वध किया। रावण की मृत्यु के साथ युद्ध समाप्त हुआ और विभीषण लंका के राजा बने।
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड