सावित्री-सत्यवान कथा
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: सावित्री, सत्यवान
सावित्री की कथा पतिव्रता नारी की बुद्धि और प्रेम की प्रसिद्ध कथा है। मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने स्वयं वर चुनते समय अंधे राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को चुना, जिसकी अल्पायु का ज्ञान देवर्षि नारद ने पहले ही दिया था।
यह कथा महाभारत के वन पर्व तथा देवी भागवत पुराण में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र सावित्री, सत्यवान, यमराज, द्युमत्सेन और नारद हैं।
विवाह के एक वर्ष बाद सत्यवान के प्राण लेने यमराज आए, तब सावित्री ने अपनी बुद्धि और वचन-कौशल से यमराज को प्रसन्न किया और पति के प्राण तथा ससुर का राज्य वापस पाया। यह कथा वैवाहिक प्रेम, साहस और धैर्य का प्रतीक है। सावित्री को चिरंजीवी स्त्रियों में गिना जाता है।
प्रसिद्ध कथन
सावित्री ने यम से कहा – जिसके पति और सुख छिन जाएँ, उसके लिए वरदान का क्या अर्थ? (भावानुवाद)
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स्रोत: महाभारत – वन पर्व