अमृत मंथन
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: समुद्र मंथन, क्षीरसागर मंथन
अमृत मंथन की कथा देवता और दैत्यों के सहयोग की कथा है। देवताओं को अमृत की प्राप्ति के लिए दैत्यों की सहायता लेनी पड़ी और दोनों ने मंदर पर्वत तथा वासुकि नाग से समुद्र मंथन किया।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध तथा विष्णु पुराण में विस्तार से वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र विष्णु, कूर्म, मंदर पर्वत, वासुकि, देवता, दैत्य और धन्वंतरि हैं।
मंथन से क्रमशः कालकूट विष, कामधेनु, उच्चैःश्रवा, ऐरावत, लक्ष्मी, चंद्र, कौस्तुभ मणि, वारुणी और अंत में धन्वंतरि हाथों में अमृत लेकर निकले। विष्णु ने मोहिनी रूप में अमृत देवताओं को पिलाया। यह कथा सहयोग और भगवान की कृपा का प्रतीक है।
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – अष्टम स्कन्ध