शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

कच-देवयानी

कथाएँ एवं घटनाएँ

देवताओं के गुरु बृहस्पति के पुत्र कच को देवताओं ने शुक्राचार्य के पास भेजा, जिससे वे उनकी संजीवनी विद्या सीख सकें। शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी कच पर मोहित हो गई। असुरों ने कच को तीन बार मार डाला, पर शुक्राचार्य ने देवयानी के आग्रह पर उसे संजीवनी विद्या से जीवित किया।

यह कथा महाभारत के आदि पर्व में वर्णित है। अंतिम बार असुरों ने कच को जलाकर उसकी भस्म शुक्राचार्य के मदिरा में मिला दी, और शुक्राचार्य ने वह मदिरा पी ली। तब शुक्राचार्य ने कच को अपने उदर से बाहर निकाला और उसे विद्या प्रदान की।

मुख्य पात्र कच, देवयानी और शुक्राचार्य हैं। गुरुकुल से विदा लेते समय देवयानी ने कच से विवाह की इच्छा प्रकट की, किंतु कच ने गुरु-पुत्री को बहन के समान मानकर इनकार किया। देवयानी ने कुपित होकर कच को शाप दिया कि उसकी विद्या निष्फल न होगी, पर वह उसे किसी को सिखा नहीं सकेगा। कथा का महत्व यह है कि विद्या और गुरु-गृह की मर्यादा इच्छाओं से ऊपर है।

प्रसिद्ध कथन

(भावानुवाद) तुमने गुरु-पुत्री को बहन मानकर मेरा प्रस्ताव ठुकराया, इसलिए तुम्हारी विद्या फलदायी तो होगी, पर दूसरों को न सिखा सकोगे।

संबंधित

शुक्रबृहस्पतिययातिपरशुराम

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व