तारकासुर वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: तारकासुर का वध, कार्तिकेय
तारकासुर नाम का असुर ब्रह्मा की तपस्या से ऐसा वरदान पा चुका था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र ही कर सकता था। इस बल पर वह देवताओं को सताने लगा और स्वर्ग पर अधिकार करने लगा।
तारकासुर के भय से देवताओं ने शिव-पार्वती के विवाह का उपाय किया, ताकि शिव-पुत्र का जन्म हो। कठोर तप के बाद पार्वती का शिव से विवाह हुआ।
अग्नि और वायु ने शिव का तेज धारण किया और गंगा के माध्यम से वह तेज शरवण वन में पहुँचा, जहाँ से कार्तिकेय (स्कन्द) का जन्म हुआ। कार्तिकेय का पालन छह कृत्तिकाओं ने किया।
देवताओं ने कार्तिकेय को अपना सेनापति बनाया और उन्होंने तारकासुर से भीषण युद्ध करके उसका वध किया। इससे देवताओं की रक्षा हुई। कार्तिकेय की महिमा तमिल परंपरा में मुरुगन के रूप में विशेष रूप से पूजित है।
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स्रोत: शिव पुराण – रुद्रसंहिता