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पंचशिख-जनक चर्चा

कथाएँ एवं घटनाएँ

मिथिला के राजा जनक ब्रह्म-प्राप्ति के लिए सदा ज्ञान-चर्चा में संलग्न रहते थे, किंतु आत्मा के स्वरूप और मृत्यु के बाद की गति पर अनेक धर्मोपदेशकों के मतों से संतुष्ट नहीं थे। एक बार पृथ्वी-परिभ्रमण करते हुए सांख्याचार्य पंचशिख कापिलेय मिथिला पधारे।

यह चर्चा महाभारत के शांति पर्व में भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को बताई गई है। पंचशिख कापिलेय प्रजापति और 'सांख्य कपिल' के नाम से प्रसिद्ध महान् ऋषि थे, जिन्होंने सहस्र वर्ष तक पंचस्तोत्र नामक मानस-यज्ञ किया था और पंचरात्र-ज्ञान में पारंगत थे।

मुख्य पात्र पंचशिख और राजा जनक हैं। पंचशिख के आने पर जनक ने अपने सौ धर्मोपदेशकों को छोड़कर उनका शिष्यत्व स्वीकार किया और उनसे सांख्य-दर्शन का गूढ़ ज्ञान प्राप्त किया। पंचशिख ने बताया कि प्रकृति और पुरुष के विवेक से ही जीव मोक्ष पाता है। कथा का महत्व यह है कि सच्चा ज्ञान गुरु की शरण में जाने और श्रद्धा-पूर्वक विचार से मिलता है।

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स्रोत: महाभारत – शांति पर्व