जड़ भरत
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: जड़ भरत, भरत
जड़ भरत की कथा वैराग्य और आत्मज्ञान की कथा है। राजा भरत (ऋषभदेव के पुत्र) ने मृग-मोह के कारण पुनर्जन्म में हरिण होकर भी स्मरण रखा और अगले जन्म में जड़ भरत बने।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कन्ध में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र जड़ भरत, राजा भरत, ऋषभदेव और राहुगण हैं।
जड़ भरत को लोग मूर्ख मानते थे, पर वे आत्मज्ञानी थे। उन्होंने राजा राहुगण को आत्म-ज्ञान का उपदेश दिया और यह बताया कि मृग-मोह से पुनर्जन्म होता है। यह कथा वैराग्य, आत्मज्ञान और मोह-त्याग की महिमा बताती है।
संबंधित
स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – पंचम स्कन्ध