दुर्योधन वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: दुर्योधन का वध, दुर्योधन अंत
युद्ध के अंतिम दिन, शल्य के वध के बाद, सभी कौरव योद्धाओं के मारे जाने पर दुर्योधन अकेला रह गया। वह युद्ध-भूमि के निकट द्वैपायन सरोवर में छिपकर रहा।
पांडवों ने उसे ढूँढ़ निकाला और चुनौती दी। दुर्योधन ने कहा कि वह अपनी समस्त सेना के मारे जाने के बाद अकेला युद्ध नहीं करेगा, पर भीम के कठोर वचनों से क्रुद्ध होकर उसने गदा-युद्ध स्वीकार किया।
भीम और दुर्योधन में भीषण गदा-युद्ध हुआ। दोनों समान बल के थे और युद्ध बराबरी का था। अंत में श्रीकृष्ण के संकेत पर भीम ने अपनी प्रतिज्ञा स्मरण की और जाँघ पर गदा का प्रहार करके दुर्योधन की जाँघ तोड़ दी।
जाँघ पर प्रहार धर्म-विरुद्ध था, इसलिए बलराम क्रुद्ध हुए। दुर्योधन भूमि पर पड़ा रहा और अंततः उसके प्राण निकल गए। कौरव-वंश का अंत हो गया और पांडवों की विजय सुनिश्चित हुई।
संबंधित
स्रोत: महाभारत – शल्य पर्व