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कूर्म अवतरण

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: कूर्म, कछुआ अवतार

विष्णुअवतारसमुद्र मंथनमंदर पर्वत

कूर्म अवतरण की कथा समुद्र-मंथन से जुड़ी है। देवता और दैत्य अमृत के लिए समुद्र मंथन कर रहे थे और मंदर पर्वत को आधार चाहिए था।

यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध तथा विष्णु पुराण में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र कूर्म (विष्णु), मंदर पर्वत, वासुकि नाग, देवता और दैत्य हैं।

विष्णु ने कूर्म (कछुआ) का रूप धारण कर मंदर पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया, जिससे मंथन संभव हुआ। मंथन से अमृत तथा अनेक रत्न निकले। यह कथा सहयोग और भगवान की सहायक शक्ति का प्रतीक है।

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कूर्म अवतारअमृत मंथनवासुकिविष्णु

स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – अष्टम स्कन्ध