राम राज्याभिषेक
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: रामराज्य, अयोध्या वापसी
रावण वध के बाद राम ने विभीषण को लंका का राज्य सौंपा और चौदह वर्ष का वनवास पूरा होने पर अयोध्या लौटने का निश्चय किया। वे सीता, लक्ष्मण और वानर-वीरों के साथ पुष्पक विमान पर बैठकर अयोध्या की ओर चले।
अयोध्या के निकट नंदिग्राम में तपस्वी-वेश में रह रहे भरत से भावपूर्ण मिलन हुआ। भरत ने सिर पर रखी चरण-पादुका राम को लौटाई और राज्य उन्हें समर्पित किया।
गुरु वशिष्ठ और अन्य ऋषियों के सान्निध्य में शुभ मुहूर्त में श्रीराम का अयोध्या के सिंहासन पर राज्याभिषेक हुआ। समस्त अयोध्या और प्रजा उत्सव से भर उठी।
राम के राज्य में प्रजा सुखी, धर्म-परायण और निर्भय रही — जिसे 'रामराज्य' कहा जाता है। राम ने लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सभी मित्रों को यथायोग्य सम्मान दिया। यह प्रसंग धर्म-राज्य और आदर्श शासन का प्रतीक है।
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड