खांडव दहन
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: खांडव वन दाह, खाण्डवदाह
पांडवों को इंद्रप्रस्थ का राज्य मिलने पर श्रीकृष्ण और अर्जुन खांडव वन में गए। वहाँ अग्निदेव ने प्रकट होकर बताया कि तक्षक आदि नागों के कारण उनका भोजन रुक गया है और वे खांडव वन को जलाना चाहते हैं।
अग्नि की सहायता के लिए कृष्ण और अर्जुन तैयार हो गए। अग्नि ने वन को चारों ओर से जलाना शुरू किया; भागते हुए प्राणियों को अर्जुन ने बाणों से रोका।
इंद्र ने अपने मित्र तक्षक तथा वन की रक्षा के लिए वर्षा करके अग्नि बुझाने का प्रयास किया। कृष्ण और अर्जुन ने अपने अस्त्रों से इंद्र की वर्षा को रोक दिया और उसे पराजित किया।
इसी दहन के समय मय दानव ने अर्जुन की शरण ली; कृष्ण की सहमति से अर्जुन ने उसे जीवनदान दिया। मय ने कृतज्ञता में आगे इंद्रप्रस्थ में दिव्य मयसभा का निर्माण किया।
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स्रोत: महाभारत – आदि पर्व